DGCA सख्त: हवाई सफर में बदसलूकी करने वालों की खैर नहीं

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Zero Tolerance

नई दिल्ली | विमानों के भीतर यात्रियों द्वारा क्रू मेंबर्स और सह-यात्रियों के साथ बढ़ती बदसलूकी की घटनाओं को देखते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने कड़ा रुख अपनाया है। DGCA ने अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) पॉलिसी को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। अब फ्लाइट में हंगामा करना न केवल आपकी जेब पर भारी पड़ेगा, बल्कि आप सालों के लिए हवाई यात्रा से प्रतिबंधित भी हो सकते हैं।

बदसलूकी के 3 स्तर और कड़ी सजा

DGCA ने यात्रियों के खराब व्यवहार को तीन श्रेणियों में बांटा है, जिसके आधार पर ‘नो-फ्लाई लिस्ट’ (No-Fly List) की अवधि तय की जाएगी:

श्रेणी (Level) व्यवहार का प्रकार सजा/प्रतिबंध की अवधि
लेवल 1 मौखिक दुर्व्यवहार, आपत्तिजनक भाषा या शारीरिक इशारे। 3 महीने तक का प्रतिबंध
लेवल 2 शारीरिक दुर्व्यवहार, धक्का-मुक्की, लात मारना या अनुचित स्पर्श। 6 महीने तक का प्रतिबंध
लेवल 3 जानलेवा हमला, विमान के सिस्टम को नुकसान पहुँचाना या गंभीर चोट। कम से कम 2 साल या उससे अधिक

पायलट और एयरलाइंस की बढ़ेगी जिम्मेदारी

नई गाइडलाइंस के मुताबिक, अब एयरलाइंस किसी भी घटना को नजरअंदाज नहीं कर सकेंगी:

  • पायलट-इन-कमांड: किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में पायलट की जिम्मेदारी होगी कि वह तुरंत स्थिति की रिपोर्ट एयरलाइन के सुरक्षा विभाग को दे।

  • त्वरित कार्रवाई: एयरलाइंस को निर्धारित समय के भीतर आंतरिक समिति का गठन करना होगा। यदि एयरलाइन कार्रवाई में ढिलाई बरतती है, तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

  • डेटा शेयरिंग: दोषी यात्री का नाम ‘नो-फ्लाई लिस्ट’ में आने के बाद उसका डेटा सभी एयरलाइंस के साथ साझा किया जाएगा, जिससे वह किसी भी कंपनी के विमान में सफर नहीं कर सकेगा।

क्यों सख्त हुए नियम?

पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों में सह-यात्रियों पर पेशाब करने, क्रू के साथ मारपीट और विमान का गेट खोलने की कोशिश जैसी कई शर्मनाक घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं ने हवाई सुरक्षा और यात्रियों के अनुभव पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। सरकार का उद्देश्य इन नियमों के जरिए यात्रियों को यह संदेश देना है कि हवाई सफर कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है।

हवाई यात्रा के दौरान हमेशा केबिन क्रू के निर्देशों का पालन करें। आपकी एक छोटी सी गलती न केवल आपके करियर और यात्रा की योजनाओं को बर्बाद कर सकती है, बल्कि आपको कानूनी मुश्किलों में भी डाल सकती है।

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