ब्रिटेन में भारतीय डॉक्टरों की राह हुई मुश्किल

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लंदन/नई दिल्ली: ब्रिटेन की सरकार ने अपनी स्वास्थ्य सेवा (NHS) को लेकर एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लिया है। हाउस ऑफ कॉमन्स में ‘मेडिकल ट्रेनिंग (प्राइऑरिटाइजेशन) बिल’ पेश किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य स्पेशिएलिटी ट्रेनिंग पोस्ट के लिए देश के स्थानीय मेडिकल ग्रेजुएट्स को प्राथमिकता देना है। इस फैसले का सीधा और सबसे बड़ा असर भारतीय डॉक्टरों पर पड़ेगा, जो हर साल बड़ी संख्या में ट्रेनिंग और नौकरी के लिए ब्रिटेन जाते हैं।

क्या है नया बिल और क्यों बदला नियम?

वर्तमान में ब्रिटेन में ‘ओपन कॉम्पिटिशन’ (2020 में शुरू) का सिस्टम लागू है, जिसमें विदेशी डॉक्टरों (IMGs) को ब्रिटिश डॉक्टरों के बराबर ही मौका मिलता था। लेकिन नए बिल के तहत:

  • स्थानीयता को प्राथमिकता: अब कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और जनरल प्रैक्टिस जैसी स्पेशलाइजेशन सीटों पर पहले ब्रिटिश छात्रों को जगह दी जाएगी।

  • प्रतिस्पर्धा में कमी: सरकार का दावा है कि इस बदलाव से स्थानीय छात्रों के लिए कॉम्पिटिशन आधा हो जाएगा। पहले एक सीट पर चार दावेदार थे, जो अब घटकर दो रह जाएंगे।

  • लागू होने की तारीख: ये नए नियम 2026 की रिक्रूटमेंट साइकिल से प्रभावी होंगे।

भारतीय डॉक्टरों पर इसका क्या असर होगा?

जून 2025 के आंकड़ों के अनुसार, NHS में 12,820 भारतीय डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस बिल से भारतीयों पर दो तरह से असर पड़ेगा:

  1. नए डॉक्टरों के लिए ‘दीवार’: जो भारतीय डॉक्टर सीधे भारत से ब्रिटेन जाने की सोच रहे हैं या वहां नए हैं, उनके लिए रास्ते कठिन हो जाएंगे। उन्हें ट्रेनिंग सीट तभी मिलेगी जब कोई ब्रिटिश ग्रेजुएट उस सीट के लिए उपलब्ध नहीं होगा।

  2. अनुभवी डॉक्टरों को कुछ राहत: ऐसे भारतीय डॉक्टर जो पहले से ब्रिटेन में हैं, जिनके पास पीआर (PR) है या जिन्होंने फाउंडेशन ट्रेनिंग पूरी कर ली है, उन्हें प्राथमिकता वाले ग्रुप में रखा गया है। सरकार चाहती है कि अनुभवी लोग देश न छोड़ें।

2035 तक का मास्टर प्लान: बाहरी निर्भरता खत्म करना

ब्रिटिश स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग द्वारा पेश किए गए इस बिल के पीछे एक बड़ी योजना है। सरकार 2035 तक अंतरराष्ट्रीय भर्ती पर अपनी निर्भरता को 34% से घटाकर 10% से कम करना चाहती है। सरकार का तर्क है कि जब वह ट्रेनिंग पर अरबों पाउंड खर्च कर रही है, तो इसका लाभ स्थानीय लोगों को मिलना चाहिए।

भविष्य की तस्वीर

हालांकि सरकार ने इस साल 1000 अतिरिक्त स्पेशिएलिटी ट्रेनिंग पोस्ट लाने का वादा किया है, लेकिन प्राथमिकता वाले नियम की वजह से विदेशियों के लिए कॉम्पिटिशन बेहद कड़ा हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय मेडिकल छात्र अब ब्रिटेन के बजाय अन्य देशों या भारत में ही बेहतर विकल्पों की तलाश कर सकते हैं।

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