क्रिकेट अंपायरिंग: मैदान के ‘असली बॉस’ बनने का सुनहरा मौका
नई दिल्ली | क्रिकेट के मैदान पर जब चौके-छक्के लगते हैं, तो सारा ध्यान खिलाड़ियों पर होता है। लेकिन खेल के हर पल पर पैनी नज़र रखने वाले वे दो शख्स, जो बिना किसी टीम के पक्ष में रहे निष्पक्ष फैसले सुनाते हैं—अंपायर—इस खेल की रीढ़ होते हैं। हाल ही में क्रिकेट जगत के दिग्गजों और अनुभवी अंपायरों से हुई बातचीत में यह सामने आया है कि अंपायरिंग अब केवल एक शौक नहीं, बल्कि एक बेहद सम्मानित और हाई-पेइंग करियर विकल्प बन चुका है।
योग्यता: किताबी ज्ञान से ज़्यादा खेल की समझ ज़रूरी
अंपायर बनने के लिए किसी विशेष डिग्री की आवश्यकता नहीं है। आप किसी भी विषय से पढ़े हों, बस आपकी रुचि क्रिकेट के नियमों (Laws of Cricket) में होनी चाहिए।
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उम्र सीमा: 18 से 40 वर्ष।
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भाषा: अच्छी कम्युनिकेशन स्किल्स और अंग्रेज़ी का बुनियादी ज्ञान (क्योंकि इंटरनेशनल क्रिकेट की यह कॉमन भाषा है)।
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फिटनेस: मैदान पर लगातार 7-8 घंटे खड़े रहने और मानसिक एकाग्रता बनाए रखने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से फिट होना अनिवार्य है।
शुरुआत से शिखर तक: चयन प्रक्रिया
अंपायर बनने का सफर सीधा नहीं है, इसमें अनुभव और धैर्य की परीक्षा होती है:
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स्टेट एसोसिएशन में रजिस्ट्रेशन: सबसे पहले अपने राज्य के क्रिकेट एसोसिएशन (जैसे DDCA, UPCA आदि) में पंजीकरण कराएं।
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लोकल अनुभव: शुरुआत में क्लब मैचों और स्थानीय लीग में अंपायरिंग कर अनुभव प्राप्त करें।
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BCCI परीक्षा: राज्य संघों द्वारा भेजे गए योग्य अंपायरों को BCCI की कठिन परीक्षा देनी होती है, जिसमें थ्योरी, प्रैक्टिकल और वाइवा शामिल है। इसमें पास होने के लिए 90% अंक अनिवार्य हैं।
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प्रमोशन: जूनियर लेवल (U-15, U-19) से शुरुआत होकर धीरे-धीरे रणजी ट्रॉफी, IPL और फिर ICC पैनल तक का रास्ता खुलता है।
कमाई और सुविधाएं: मिलता है लग्जरी लाइफस्टाइल
इस क्षेत्र में करियर बनाने वालों के लिए आर्थिक लाभ भी बहुत आकर्षक हैं:
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डोमेस्टिक लेवल: BCCI के मैचों में एक अंपायर को औसतन ₹40,000 प्रतिदिन तक मिलते हैं।
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सुविधाएं: फाइव-स्टार होटलों में ठहरना, हवाई यात्रा और अन्य भत्ते इस पैकेज का हिस्सा होते हैं।
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क्लब क्रिकेट: स्थानीय स्तर पर भी औसतन ₹3,000 प्रतिदिन तक की कमाई हो सकती है।
“अंपायरिंग का मतलब सिर्फ नियम याद रखना नहीं है, बल्कि दबाव में सही फैसले लेने का कौशल है। अगर आपमें धैर्य और क्रिकेट के प्रति जुनून है, तो यह प्रोफेशन आपको वह सब कुछ दे सकता है जिसकी आप कल्पना करते हैं।” – अनिल चौधरी, आईसीसी अंपायर
तैयारी के लिए मुख्य पुस्तकें
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MCC Law Book: क्रिकेट के बुनियादी नियमों के लिए।
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टॉम स्मिथ की ‘क्रिकेट अंपायरिंग एंड स्कोरिंग’: नियमों की गहराई समझने के लिए।
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BCCI प्लेइंग कंडीशंस: नवीनतम नियमों और बदलावों की जानकारी के लिए।
निष्कर्ष: 60-65 साल की उम्र तक सक्रिय रहने वाला यह करियर उन युवाओं के लिए बेहतरीन है जो क्रिकेट के मैदान से जुड़े रहना चाहते हैं और अनुशासन के साथ खेल का संचालन करना चाहते हैं।
