नाटक ‘डर और पीपल का पेड़’ का जीवंत मंचन, सोनल हुए सम्मानित

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sonal mahesh devl

लखनऊ। कहानियां सदैव हमारे लोकजीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। इन्होंने समाज की विडम्बनाओं, विसंगतियों और मानवीय त्रासदियों को उद्घाटित किया है। यही कहानियां जब रंगमंच के माध्यम से समाज के सामने आती हैं, तो चुनौती यह होती है कि उनकी आत्मा भी संरक्षित रहे और मंचीय प्रस्तुति का प्रभाव भी बरकरार रहे।

इसी उद्देश्य के साथ वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल मिश्रा ‘गुरुजी’ के रंग-आलेख, परिकल्पना एवं निर्देशन में कथाकार रजत रानी ‘मीनू’ तथा उर्मिला शिरीष की दो कहानियों पर आधारित नाटक ‘डर और पीपल का पेड़’ का गुरुवार को राय उमानाथ बली सभागार में मंचन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कर्नल जीपीएस कौशिक थे, जिन्होंने अनिल मिश्रा के रंग-जगत में योगदान पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के दौरान अमुक आर्टिस्ट ग्रुप की ओर से दिए जाने वाले वार्षिक सम्मान ‘रंगाचार्य डॉ. विश्वनाथ मिश्र स्मृति सम्मान 2025’ से लखनऊ के प्रतिष्ठित रंगकर्मी सोनल ठाकुर को सम्मानित किया गया।

नाटकों की संवेदनशील कथावस्तु

अनिल मिश्रा ‘गुरुजी’ ने बताया कि वे लम्बे समय से कहानियों को मंच पर रूपांतरित करते आए हैं। इस बार भी दो शीर्ष महिला कथाकारों की कहानियों को चुना गया, जिनके केंद्र में स्त्री-जीवन के प्रश्न और संवेदनाएं हैं।

रजत रानी ‘मीनू’ की कहानी — “डर”

यह कथा एक दलित महिला के संघर्षों का मार्मिक चित्रण है, जो घरों में काम करके अपने बेटे को शिक्षित कर बड़ा बनाती है। बेटा नौकरी करके घर बसाता है, पर माँ को नहीं भूलता। पत्नी के घर में नौकरानी रखने के आग्रह पर उसे माँ की मेहनतकश छवि सामने आ जाती है। बेटा कई बार माँ को अपने साथ ले जाना चाहता है, पर माँ समाज के भेदभाव और जीविकोपार्जन छूटने के डर से मना कर देती है। अंततः उसकी मृत्यु हो जाती है और कहानी गहरी संवेदना छोड़ जाती है।

उर्मिला शिरीष की कहानी — “पीपल का पेड़”

यह कथा एक पति की अपने परिवार और पत्नी के प्रति निस्वार्थ सोच को सामने लाती है। अस्पताल में मृत्यु से जूझता पति डायरी में रोज अपनी मन:स्थितियां दर्ज करता है—प्राइवेट अस्पतालों की अव्यवस्था, पत्नी-बच्चों की कठिनाइयाँ और आर्थिक जद्दोजहद। पति की मृत्यु के बाद पता चलता है कि उसने 6 एकड़ जमीन पत्नी के नाम कर दी है, यह कहते हुए कि “बच्चों को मत बताना, तुम सम्मान से जीना, यही मेरी अभिलाषा है।”

कलाकारों का प्रभावशाली अभिनय

मंचन में विष्णु पाण्डेय, अनामिका सिंह, अर्चना जैन, नीरज शब्द, शशांक पाण्डेय, निशान्त पाण्डेय, अभिषेक दुबे, वर्षा कुमारी, ज्योति गुप्ता, प्रियंका सारस्वत, शोभित राजपूत, रवि कश्यप, छवि श्रीवास्तव, मोनिका अग्रवाल आदि कलाकारों ने प्रभावी अभिनय प्रस्तुत किया।

प्रकाश परिकल्पना संतोष कुमार ‘समायर’, संगीत संयोजन संतोष शर्मा ‘बब्लू’, रूपसज्जा पं. दिनेश अवस्थी, वेशभूषा अनामिका, ज्योति, वर्षा और प्रियंका ने संभाली।
मंच प्रबंधन संजय त्रिपाठी ‘गोपाल’ तथा मंच सहयोग में अनामिका सिंह, कृष्ण कुमार पाण्डेय, संतोष प्रजापति, मोनिश सिद्दीकी, विष्ण पाण्डेय, शोभित राजपूत, रवि कश्यप, अनमोल मौर्या और शिवा का विशेष योगदान रहा।

सोनल ठाकुर हुए सम्मानित

सम्मान प्राप्त करते हुए प्रतिष्ठित रंगकर्मी सोनल ठाकुर को मुख्य अतिथि कर्नल जीपीएस कौशिक ने संवेदनशील, गंभीर और समाज-निष्ठ रंगकर्मी बताया। लगभग तीन दशकों की उनकी रंगयात्रा—नुक्कड़ नाटक, रंगमंच, मीडिया और जनसरोकारों से जुड़े कार्यों—की सराहना की गई। कौशिक ने कहा कि सोनल ठाकुर को ‘संस्कृतिकर्मी’ कहना अधिक उपयुक्त होगा। संस्था ने उनके योगदान को देखते हुए उन्हें सम्मानित किया।

काकोरी कांड के शहीदों की स्मृति यात्रा 19 दिसंबर को

“शहीदों की ओर चलो” शीर्षक से स्मृति यात्रा 19 दिसंबर 2025 को सुबह 9:50 बजे सुभाष चौक (परिवर्तन चौक के निकट) से काकोरी शहीद स्मारक तक निकलेगी।

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