BRICS में बनी सहमति, एकतरफा युद्ध के खिलाफ संयुक्त घोषणा पर मुहर
नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में हो रहे BRICS शिखर सम्मेलन 2026 में सदस्य देशों के बीच संयुक्त घोषणा को लेकर अहम सहमति बन गई है। सूत्रों के मुताबिक, घोषणा में किसी भी देश द्वारा एकतरफा युद्ध या सैन्य कार्रवाई की निंदा की जाएगी, लेकिन किसी विशेष देश का नाम लेकर आलोचना नहीं की जाएगी।
यह सहमति ऐसे समय बनी है जब पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और ईरान से जुड़े घटनाक्रम को लेकर BRICS देशों के बीच अलग-अलग रुख सामने आ रहे हैं। खास तौर पर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेदों के बावजूद सदस्य देशों ने साझा भाषा पर सहमति बनाने की कोशिश की।
युद्ध पर साझा रुख बनाने में भारत की अहम भूमिका
नई दिल्ली में चल रहे शिखर सम्मेलन में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती BRICS के विस्तारित समूह के भीतर अलग-अलग भू-राजनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाना थी। बातचीत के दौरान युद्ध और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनाने के लिए गहन वार्ता हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, संयुक्त घोषणा पर सहमति बनना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि है।
घोषणा में एकतरफा सैन्य कार्रवाई का विरोध करने के साथ अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षीय व्यवस्था के महत्व पर जोर दिए जाने की उम्मीद है। BRICS पहले भी संयुक्त राष्ट्र चार्टर और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के सिद्धांतों का समर्थन करता रहा है।
ईरान और UAE के मतभेद के बीच बनी सहमति
BRICS के विस्तार के बाद संगठन में ऐसे देश भी शामिल हैं जिनके पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्षों को लेकर हित और दृष्टिकोण अलग-अलग हैं। ईरान और UAE के बीच मतभेदों के कारण संयुक्त घोषणा की भाषा तय करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था। इसके बावजूद सदस्य देशों ने ऐसी भाषा पर सहमति बनाई जिसमें किसी एक देश को सीधे निशाना बनाने से बचा गया है।
शी जिनपिंग ने BRICS से शांति में भूमिका निभाने को कहा
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी BRICS से पश्चिम एशिया के संघर्ष में शांति स्थापित करने में भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युद्ध अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हित में नहीं है और चीन अन्य BRICS देशों के साथ मिलकर समाधान की दिशा में काम करने को तैयार है।
व्यापार और वैश्विक व्यवस्था पर भी फोकस
BRICS घोषणा में सिर्फ युद्ध और सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार और आर्थिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं। नई दिल्ली घोषणा में सदस्य देशों ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापार बाधाओं को लेकर चिंता जताई है और निष्पक्ष बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया है।
BRICS में अब 11 सदस्य देश शामिल हैं और यह समूह वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने तथा वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक संस्थाओं में सुधार की मांग को आगे बढ़ा रहा है।
कुल मिलाकर, संयुक्त घोषणा पर बनी सहमति को BRICS के भीतर अलग-अलग रणनीतिक हितों के बावजूद साझा न्यूनतम एजेंडा तैयार करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। खास बात यह है कि युद्ध की निंदा करते हुए किसी देश का नाम नहीं लिया जाएगा, जिससे संगठन के भीतर व्यापक सहमति बनाए रखने का रास्ता खुला है।
