BRICS: थरूर बोले- दुनिया में अपनी बात रखने का बड़ा मंच
नई दिल्ली। भारत में हो रहे BRICS शिखर सम्मेलन के बीच संगठन की उपयोगिता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने BRICS से भारत को होने वाले फायदों को गिनाते हुए कहा कि यह मंच भारत को वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती से उठाने का अवसर देता है।
दरअसल, कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने BRICS से भारत को मिलने वाले ठोस लाभों पर सवाल उठाए थे। इसके जवाब में थरूर ने संगठन को सिर्फ बैठकों और घोषणाओं तक सीमित मानने के बजाय भारत के लिए इसके व्यापक कूटनीतिक महत्व को सामने रखा।
भारत को अपनी प्राथमिकताएं रखने का मौका
थरूर के मुताबिक BRICS भारत को दुनिया की बदलती शक्ति-संरचना में अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखने का महत्वपूर्ण मंच देता है। भारत इस मंच के जरिए वैश्विक संस्थाओं में सुधार, विकासशील देशों के हित और अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व की मांग को आगे बढ़ा सकता है।
BRICS के विस्तार के बाद इस मंच का भौगोलिक और आर्थिक प्रभाव भी बढ़ा है। ऐसे में भारत के लिए विभिन्न क्षेत्रों के देशों के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं भी व्यापक हुई हैं।
सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा अहम
थरूर ने जिन प्रमुख मुद्दों का उल्लेख किया, उनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार खास तौर पर महत्वपूर्ण है। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता और वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की बेहतर भागीदारी की वकालत करता रहा है।
BRICS जैसे मंच पर इस मुद्दे को उठाने से भारत को समान सोच रखने वाले देशों के साथ समर्थन जुटाने का अवसर मिलता है।
ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने का अवसर
BRICS को भारत ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए भी महत्वपूर्ण मंच मानता है। विकास, वित्त, तकनीक, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक संस्थाओं में प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर विकासशील देशों के साझा हित हैं।
ऐसे में भारत के लिए BRICS की अध्यक्षता और दिल्ली में होने वाला शिखर सम्मेलन केवल एक कूटनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि विकासशील देशों के एजेंडे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने का अवसर भी है।
पश्चिम विरोधी मंच नहीं बनना चाहिए: थरूर
इसी बीच थरूर ने सरकार को यह भी सलाह दी कि BRICS को पश्चिम-विरोधी मंच के रूप में पेश करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के राष्ट्रीय हित व्यापक और संतुलित विदेश नीति में हैं। भारत को BRICS के साथ संबंध मजबूत करते हुए अमेरिका और यूरोप समेत पश्चिमी देशों के साथ भी अपने रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को संतुलित रखना चाहिए।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दिल्ली में BRICS सम्मेलन से पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहुंच चुके हैं और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई शीर्ष नेताओं की मौजूदगी पर दुनिया की नजर है।
मोदी-पुतिन-शी की मौजूदगी ने बढ़ाई अहमियत
दिल्ली में होने वाले सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी इसे खास बना रही है। व्यापार, भुगतान प्रणाली, ऊर्जा, वैश्विक शासन और ग्लोबल साउथ की भूमिका जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
असली परीक्षा अब नतीजों की
BRICS को लेकर उठ रहे सवालों के बीच थरूर की टिप्पणी ने बहस को एक नया आयाम दिया है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि BRICS से भारत को क्या मिलता है, बल्कि यह भी है कि भारत अपनी अध्यक्षता और दिल्ली सम्मेलन का इस्तेमाल अपने राष्ट्रीय हितों और वैश्विक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कितनी प्रभावी तरीके से करता है।
दिल्ली में जुट रहे दुनिया के बड़े नेताओं के बीच भारत के लिए BRICS अब केवल कूटनीति का मंच नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति-संतुलन में अपनी भूमिका मजबूत करने की बड़ी परीक्षा भी है।
