लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक पारित

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नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में सोमवार को विपक्ष के जोरदार हंगामे के बीच लोकसभा ने सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। इस विधेयक के तहत सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाकर 38 (मुख्य न्यायाधीश सहित) कर दी गई है। सरकार का कहना है कि इस कदम से लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण में मदद मिलेगी।

संसद की कार्यवाही के दौरान विपक्ष ने छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई, नीट पेपर लीक और राम मंदिर चंदा विवाद जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग करते हुए नारेबाजी की, जिसके कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार बाधित हुई।

हंगामे के बीच सरकार ने अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए लोकसभा में इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट विधेयक, 2026 और बैंकर्स बुक्स एविडेंस विधेयक, 2026 भी पेश किए। वहीं राज्यसभा ने एमएसएमई विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के भुगतान संबंधी विवादों का तेज़ी से निपटारा करना है।

लगातार व्यवधान के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही दिनभर प्रभावित रही और अंततः उन्हें मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर टकराव जारी रहने के आसार हैं।

आइए जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या कब-कब बढ़ाई गई है

  • 28 जनवरी 1950 को भारत में संविधान लागू होने के बाद सुप्रीम कोर्ट का उद्घाटन हुआ। यह उद्घाटन पुरानी संसद भवन के ‘चैंबर ऑफ प्रिंसेस’ में हुआ, जहां 1937 से 1950 तक 12 वर्षों तक भारत की फेडरल कोर्ट बैठती थी।
  • 1950 में भारत के सुप्रीम कोर्ट में कुल 8 जज थे। इनमें 1 चीफ जस्टिस और 7 अन्य जज थे।
  • 1956 में संविधान संशोधन के जरिए जजों की संख्या चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया समेत बढ़ाकर 11 कर दी गई।
  • 1960 में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या फिर बढ़ाई गई। सर्वोच्च न्यायालय में जजों की संख्या 14 (CJI सहित) कर दी गई।
  • 1977 में एक बार फिर जजों की संख्या बढ़ाकर 14 से 18 कर दी गई।
  • 1986 में सबसे बड़ी बढ़ोतरी हुई, जब सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 18 से बढ़ाकर 26 (CJI सहित) कर दी गई।
  • 2008 में एक बार फिर संशोधन किया गया। मुकदमों का बोझ बढ़ने के कारण जजों की संख्या 31 (CJI सहित) कर दी गई।
  • 2019 में 11 वर्षों बाद फिर संशोधन कर जजों की संख्या 34 (CJI सहित) कर दी गई।
  • 2026 में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या फिर बढ़ाई गई। इस संशोधन के जरिए सुप्रीम कोर्ट में कुल जजों की संख्या 38 कर दी गई।

इस तरह 1950 से अब तक सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या कुल 7 बार बढ़ाई जा चुकी है।

14 करोड़ का अलग से खर्च

सरकार का अनुमान है कि जजों की संख्या बढ़ने से सरकारी खजाने पर 14.04 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। इसमें अतिरिक्त जजों और सपोर्ट स्टाफ के लिए हर साल 10.56 करोड़ रुपये का खर्च तथा कार्यालयी (ऑफिसियल) इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एकमुश्त 3.47 करोड़ रुपये का खर्च शामिल है।

यह फैसला देश की सबसे बड़ी अदालत में बढ़ते लंबित मामलों को देखते हुए लिया गया है। संसदीय कार्यवाही के दौरान पेश किए गए न्यायिक आंकड़ों के अनुसार 2026 की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट में 92,000 से अधिक मामले लंबित थे।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट अपनी पूरी क्षमता के करीब काम कर रहा है, फिर भी नए मामलों के आने की रफ्तार उनके निपटारे की रफ्तार से अधिक बनी हुई है। बेंचों की संख्या बढ़ने से मुकदमों का बेहतर प्रबंधन होगा और लंबे समय से लंबित संवैधानिक मामलों की सुनवाई के लिए अधिक समर्पित बेंच उपलब्ध हो सकेंगी।

लोकसभा से मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक अब राज्यसभा में विचार और मंजूरी के लिए जाएगा। इसके बाद इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने पर यह कानून बन जाएगा।

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