ईरान की दो टूक: न सीजफायर होगा, न बातचीत, जब तक जरूरी जारी रहेगा युद्ध
तेहरान/नई दिल्ली | मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान ने शांति की तमाम संभावनाओं को फिलहाल सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक बड़ा बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि उनके देश ने न तो किसी से युद्ध विराम (सीजफायर) का अनुरोध किया है और न ही वे अभी किसी तरह की बातचीत के लिए तैयार हैं। अराघची के इस रुख ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति बहाली की कोशिशों को बड़ा झटका दिया है।
‘जब तक जरूरी होगा, तब तक लड़ेंगे’
ईरान के विदेश मंत्री ने प्रेस टीवी के माध्यम से कहा कि ईरान के सशस्त्र बल तब तक इस युद्ध को जारी रखेंगे, जब तक यह रणनीतिक रूप से जरूरी होगा। पिछले तीन सप्ताह से ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच सीधे हमले जारी हैं। अराघची ने साफ किया कि ईरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ठप: 20% तेल सप्लाई पर संकट
युद्ध का सबसे घातक असर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर पड़ा है। वैश्विक स्तर पर होने वाली कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान ने दावा किया है कि उसने इस रास्ते को जानबूझकर ब्लॉक नहीं किया है, लेकिन अमेरिकी हमलों के कारण फैली असुरक्षा की वजह से यहाँ जहाजों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है।
वर्तमान में सैकड़ों मालवाहक जहाज इस समुद्री क्षेत्र में फंसे हुए हैं। शिपिंग कंपनियों और तेल निर्यातकों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए परिचालन बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है।
भारत सहित दुनिया पर ईंधन संकट का साया
ईरान के इस सख्त रवैये और समुद्री मार्ग के ठप होने से भारत जैसे तेल आयातक देशों की चिंता बढ़ गई है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और एविएशन फ्यूल (ATF) की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो सकती है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
बता दें कि इस ताज़ा संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब इजरायल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके जवाब में ईरान ने यूएई, बहरीन, सऊदी अरब और कतर जैसे पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं।
