भारत पर करोड़ों की बारिश: संजू सैमसन बने ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’

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नई दिल्ली | टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में न्यूज़ीलैंड को 96 रनों से करारी शिकस्त देकर लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने वाली भारतीय टीम पर इनामी राशि की बौछार हो रही है। खिताबी जीत के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) और बीसीसीआई ने खिलाड़ियों के लिए पुरस्कारों की घोषणा की है। इस पूरे टूर्नामेंट में बल्ले से आग उगलने वाले संजू सैमसन को ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ के प्रतिष्ठित खिताब से नवाजा गया है।

संजू सैमसन: रनों का अंबार और लाखों का ईनाम

शुरुआती मैचों में बेंच पर बैठने के बाद, संजू सैमसन ने मौका मिलते ही इतिहास रच दिया। उन्होंने टूर्नामेंट के केवल 5 मैचों में 321 रन बनाए, जिसमें लगातार तीन अर्धशतकों की हैट्रिक शामिल है।

  • इनामी राशि: प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बनने के लिए संजू को 25,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 21 लाख रुपये) मिले।

  • धमाकेदार पारियां: वेस्टइंडीज के खिलाफ नाबाद 97 और फाइनल में 89 रनों की पारी ने भारत की जीत सुनिश्चित की।

जसप्रीत बुमराह: फाइनल के ‘सुपरमैन’

फाइनल मुकाबले में न्यूज़ीलैंड की कमर तोड़ने वाले घातक गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। बुमराह ने फाइनल में 4 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए, जिसके लिए उन्हें लगभग 8.4 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।

चैंपियन टीम इंडिया को मिले 27.48 करोड़

लगातार दो बार टी-20 वर्ल्ड कप जीतने वाला पहला देश बनकर भारत ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

  • विजेता (भारत): खिताब जीतने वाली टीम इंडिया को कुल 27.48 करोड़ रुपये की प्राइज मनी मिली।

  • उपविजेता (न्यूज़ीलैंड): फाइनल में हारने वाली कीवी टीम को 14.65 करोड़ रुपये से संतोष करना पड़ा।

मैच का लेखा-जोखा: बना ऐतिहासिक रिकॉर्ड

फाइनल मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 256 रनों का विशाल स्कोर बनाया, जो टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल के इतिहास का सबसे बड़ा स्कोर है। लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूज़ीलैंड की टीम भारतीय गेंदबाजों के अनुशासन के आगे टिक नहीं सकी और पूरी टीम 159 रनों पर सिमट गई।

ईशान किशन और संजू सैमसन की बल्लेबाजी और बुमराह-सिराज की गेंदबाजी के दम पर भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि क्रिकेट की दुनिया में उसका कोई सानी नहीं है। इस शानदार जीत से पूरे देश में जश्न का माहौल है और खेल विशेषज्ञों ने इसे भारतीय क्रिकेट का ‘स्वर्ण युग’ करार दिया है।