IDFC First Bank में ₹590 करोड़ का जाली चेक घोटाला
चंडीगढ़/मुंबई | IDFC First Bank की चंडीगढ़ शाखा में ₹590 करोड़ की भारी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। जाली चेक (Forged Cheques) के जरिए अंजाम दिए गए इस घोटाले ने बैंकिंग क्षेत्र और निवेशकों के बीच हड़कंप मचा दिया है। इस धोखाधड़ी का शिकार मुख्य रूप से हरियाणा सरकार से जुड़े विभाग हुए हैं।
कैसे खुला मामला?
जानकारी के अनुसार, यह घोटाला तब सामने आया जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद करने और फंड ट्रांसफर करने का आवेदन दिया। बैंक के रिकॉर्ड और सरकारी रिकॉर्ड के मिलान के दौरान बैलेंस में भारी अंतर पाया गया, जिससे बैंक प्रबंधन के होश उड़ गए।
साइबर हमला नहीं, अंदरूनी मिलीभगत: एमडी वैद्यनाथन
बैंक के एमडी और सीईओ वी. वैद्यनाथन ने निवेशकों के साथ एक वर्चुअल मीटिंग में स्पष्ट किया कि यह कोई डिजिटल या साइबर हमला नहीं है। उन्होंने इसे बैंक के कुछ कर्मचारियों और बाहरी अपराधियों के बीच सांठगांठ (Collusion) का परिणाम बताया। वैद्यनाथन ने कहा, “धोखाधड़ी भौतिक चेक (Physical Cheques) के साथ की गई है, जो बैंक के सिस्टम की सुरक्षा में सेंध नहीं, बल्कि भरोसे का उल्लंघन है।”
बैंक की कड़ी कार्रवाई और ऑडिट
मामला सामने आते ही बैंक ने चंडीगढ़ शाखा के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही बैंक ने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई है और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। मामले की गहराई से जांच के लिए दुनिया की दिग्गज ऑडिट फर्म KPMG को फॉरेंसिक ऑडिट का जिम्मा सौंपा गया है, जिसकी रिपोर्ट 5 हफ्तों में आने की उम्मीद है।
हरियाणा सरकार ने बैंक को किया ‘ब्लैकलिस्ट’
घोटाले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा सरकार ने सख्त कदम उठाया है। सरकार ने IDFC First Bank को अपनी अधिकृत बैंक सूची से हटा (De-empanelled) दिया है। अब राज्य का कोई भी विभाग इस बैंक के साथ नया लेन-देन नहीं कर सकेगा।
बाजार में कोहराम
इस खबर का असर शेयर बाजार पर भी दिखा। मंगलवार को कारोबार के दौरान IDFC First Bank का शेयर 20% तक गिरकर लोअर सर्किट पर बंद हुआ। हालांकि, बैंक प्रमुख ने आश्वासन दिया है कि ग्राहकों की जमा राशि सुरक्षित है और इस घाटे के लिए बैंक पर्याप्त प्रावधान करेगा।
