आजमगढ़ का अनसुना इतिहास और राजपूत राजा का इस्लाम कुबूल करना
आजमगढ़: उत्तर प्रदेश का यह जिला आज अपनी ‘ब्लैक पॉटरी’ और रेशमी साड़ियों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस शहर की नींव एक राजपूत राजा के धर्म परिवर्तन और उनके परिवार के भीतर उपजे एक बड़े विद्रोह से जुड़ी है? आइए जानते हैं महर्षि दुर्वासा की इस तपोभूमि के अभिमन्यु सिंह से आजमगढ़ बनने तक का पूरा सफर।
वीर अभिमन्यु सिंह से ‘दौलत इब्राहिम खान’ तक का सफर
इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि मुगल बादशाह जहांगीर के दौर में इलाहाबाद सूबे (वर्तमान जौनपुर क्षेत्र) में विद्रोह की आग भड़की हुई थी। जहांगीर ने इस बगावत को कुचलने के लिए गौतम वंशीय राजपूत राजा अभिमन्यु सिंह को चुना। अभिमन्यु सिंह ने न केवल विद्रोह को शांत किया, बल्कि अपनी वीरता से मुगलिया सल्तनत का दिल जीत लिया।
खुश होकर जहांगीर ने उन्हें 1500 घुड़सवारों की टुकड़ी और भारी जागीर दी। इसी दौरान अभिमन्यु सिंह ने इस्लाम अपना लिया और उनका नया नाम हुआ— दौलत इब्राहिम खान। उन्होंने मेहनगर को अपनी राजधानी बनाया, जहाँ उनका 36 दरवाजों वाला ऐतिहासिक मकबरा आज भी मुगलकालीन नक्काशी का बेजोड़ नमूना है।
रानी रतन ज्योति सिंह और ‘रानी की सराय’ का रहस्य
दौलत इब्राहिम खान की कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने अपने भतीजे हरिवंश सिंह को अपना उत्तराधिकारी बनाया। हरिवंश सिंह ने भी बाद में इस्लाम कुबूल कर लिया और एक मुस्लिम महिला कमरुन्निसा से निकाह किया।
यह बात उनकी पहली पत्नी रानी रतन ज्योति सिंह को नागवार गुजरी। स्वाभिमानी रानी ने अपने पति का घर छोड़ दिया और अपने बच्चों के साथ एक सराय में रहने लगीं। वह स्थान आज भी आजमगढ़ में ‘रानी की सराय’ के नाम से जाना जाता है, जो एक महिला के स्वाभिमान की गवाही देता है।
कैसे पड़ा ‘आजमगढ़’ नाम?
राजा हरिवंश सिंह और रानी रतन ज्योति सिंह के पुत्र विक्रमजीत सिंह हुए। उनके दो बेटे थे— आजम खान और अजमत खान।
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आजम खान: इन्होंने सन् 1665 में तमसा नदी के किनारे एक नया शहर बसाया, जिसे उनके नाम पर ‘आजमगढ़’ कहा गया।
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अजमत खान: इन्होंने ‘अजमतगढ़’ रियासत की स्थापना की, जो आज भी एक प्रमुख नगर पंचायत है।
आजमगढ़: साहित्य और कला का संगम
आजमगढ़ केवल युद्धों और राजाओं की ही भूमि नहीं रही, बल्कि इसने दुनिया को महान साहित्यकार और कलाकार दिए हैं:
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साहित्य: महापंडित राहुल सांकृत्यायन, अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’, अल्लामा शिब्ली नोमानी और मशहूर शायर कैफी आजमी।
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कला: निजामाबाद की ‘ब्लैक पॉटरी’ (काली मिट्टी के बर्तन) और मुबारकपुर की रेशमी साड़ियाँ।
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प्रशासन: ब्रिटिश काल में 1832 में यह जिला बना और सर थॉमसन इसके पहले कलेक्टर बने।
एक नज़र में आजमगढ़ का इतिहास
| विवरण | जानकारी |
| संस्थापक | आजम खान (1665) |
| मूल वंश | गौतम वंशीय राजपूत (अभिमन्यु सिंह के वंशज) |
| ऐतिहासिक स्थल | दौलत इब्राहिम खान का मकबरा (मेहनगर), रानी की सराय |
| प्रसिद्ध हस्तियां | कैफी आजमी, बाबू विश्राम राय (पूर्वांचल के गांधी) |
