सिर्फ खांसी की होगी बीमारी की पहचान! एम्स ने दी AI एप ‘स्वासा’ को हरी झंडी
नई दिल्ली | हेल्थकेयर की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आया है। अब आपको सांस संबंधी गंभीर बीमारियों जैसे अस्थमा और COPD की पहचान के लिए घंटों इंतजार नहीं करना होगा। मोबाइल के सामने सिर्फ दो-तीन बार खांसने से आपकी बीमारी का पता चल जाएगा। एम्स (AIIMS) दिल्ली ने इस नई तकनीक ‘स्वासा’ (Swasa) को अपनी मंजूरी दे दी है।
कैसे काम करती है यह जादुई तकनीक?
‘स्वासा’ एक AI-आधारित मोबाइल एप्लीकेशन है जो आवाज के विज्ञान पर काम करती है। इसका इस्तेमाल बेहद आसान है:
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यूजर को अपने स्मार्टफोन के सामने 2-3 बार खांसना होता है।
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एप इस आवाज को रिकॉर्ड करता है और अपने एडवांस AI एल्गोरिद्म के जरिए फेफड़ों की स्थिति का विश्लेषण करता है।
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मात्र 8 मिनट के भीतर यह एप रिपोर्ट तैयार कर देता है, जिसमें बीमारी के प्रकार और उसके स्तर (Level) की सटीक जानकारी होती है।
एम्स में सफल रहा परीक्षण (Trial)
एम्स नई दिल्ली के सेंटर फॉर कम्यूनिटी मेडिसिन ने इस एप का व्यापक परीक्षण किया है।
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मरीजों की संख्या: करीब 460 मरीजों पर इसका ट्रायल किया गया।
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सटीकता: वैज्ञानिकों ने इस एप की तुलना ‘गोल्ड स्टैंडर्ड स्पाइरोमेट्री टेस्ट’ (जो वर्तमान में सबसे भरोसेमंद माना जाता है) से की और इसे काफी प्रभावी पाया।
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परिणाम: रिसर्च में सामने आया कि यह एप शुरुआती स्तर पर ही अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) की पहचान करने में सक्षम है।
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए संजीवनी
भारत के दूरदराज के इलाकों में जहां बड़े अस्पताल, एक्स-रे मशीन या सीटी स्कैन की सुविधाएं नहीं हैं, वहां यह एप किसी वरदान से कम नहीं होगा।
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सस्ता और सुलभ: जटिल और महंगे मेडिकल टेस्ट की तुलना में यह काफी किफायती साबित होगा।
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त्वरित इलाज: बीमारी का जल्दी पता चलने से मरीज का इलाज समय पर शुरू हो सकेगा, जिससे जान का खतरा कम होगा।
भविष्य की योजना: अब टीबी पर नजर
विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल यह एप अस्थमा और COPD के लिए तैयार है, लेकिन वैज्ञानिक इस पर आगे काम कर रहे हैं। आने वाले समय में इसी तकनीक के जरिए टीबी (Tuberculosis) जैसी घातक बीमारी की पहचान करने की भी योजना है। अगर यह सफल होता है, तो भारत को टीबी मुक्त बनाने के अभियान में यह सबसे बड़ा हथियार साबित होगा।
न्यूज़हॉक की राय
तकनीक और स्वास्थ्य का यह मेल भविष्य की ओर एक बड़ा कदम है। हालांकि, ‘स्वासा’ जैसे एप प्राथमिक जांच के लिए बेहतरीन हैं, लेकिन रिपोर्ट आने के बाद विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना हमेशा अनिवार्य है।
