उज्जैन: बाबा महाकाल के दरबार में ‘शिव नवरात्रि’ का आगाज
उज्जैन: धार्मिक नगरी उज्जैन में विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर के मंदिर में ‘शिव नवरात्रि’ का महापर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। आमतौर पर नवरात्रि शक्ति की उपासना का पर्व होता है, लेकिन उज्जैन में महाकाल के विवाह का उत्सव ‘शिव नवरात्रि’ के रूप में मनाने की सदियों पुरानी और अनूठी परंपरा है।
9 नहीं 10 दिनों का महापर्व
इस वर्ष विशेष तिथियों के संयोग के कारण शिव नवरात्रि का यह महापर्व 10 दिनों तक मनाया जाएगा। यह उत्सव फाल्गुन कृष्ण पंचमी से शुरू होकर महाशिवरात्रि तक चलता है। इस दौरान भगवान महाकाल को प्रतिदिन एक दूल्हे की तरह सजाया जाता है और विवाह की तमाम रस्में निभाई जाती हैं।
भगवान को लगेगा हल्दी का उबटन
उत्सव के पहले दिन कोटेश्वर महादेव का अभिषेक और पूजन किया जाता है। इसके बाद बाबा महाकाल को केसरिया हल्दी और सुगंधित उबटन लगाया जाता है। 11 ब्राह्मणों द्वारा गर्भगृह में ‘लघु रुद्र’ का पाठ किया जाता है, जो अगले 10 दिनों तक निरंतर चलेगा। शाम के समय भगवान का विशेष श्रृंगार कर उन्हें नए वस्त्र धारण कराए जाते हैं।
हर दिन एक नया स्वरूप
इन 10 दिनों में श्रद्धालु बाबा महाकाल के अलग-अलग मनमोहक स्वरूपों के दर्शन कर सकेंगे:
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विभिन्न श्रृंगार: मनमहेश, उमा-महेश, चंद्रमौलेश्वर, छबीना, और शिव-तांडव जैसे रूपों में बाबा भक्तों को दर्शन देंगे।
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सेहरा दर्शन: महाशिवरात्रि के दिन भगवान को फूलों का ‘सेहरा’ बांधा जाएगा, जो उनके दूल्हा स्वरूप की पूर्णता का प्रतीक है।
उज्जैन की अनूठी परंपरा
देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में केवल उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में ही शिव नवरात्रि मनाने की परंपरा है। यहाँ शिव को ‘शक्ति’ के समान नौ या दस दिनों तक पूजा जाता है। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए दर्शन की विशेष व्यवस्था की है। 15 फरवरी तक चलने वाले इस उत्सव का समापन महाशिवरात्रि के अगले दिन दोपहर में होने वाली ‘भस्म आरती’ के साथ होगा।
