मिलिट्री स्कूल से NSA तक: ‘भारत के जेम्स बॉन्ड’ अजीत डोभाल की गौरवगाथा
नई दिल्ली। भारत की सुरक्षा रणनीति के चाणक्य और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर बालाकोट एयरस्ट्राइक तक, देश की सुरक्षा से जुड़े हर बड़े फैसले के पीछे डोभाल का ‘मास्टरमाइंड’ माना जाता है। लेकिन, एक साधारण छात्र से लेकर भारत के सबसे शक्तिशाली नौकरशाह बनने तक का उनका सफर साहस और बुद्धिमत्ता की अद्भुत मिसाल है।
शिक्षा: अर्थशास्त्र में दिखाई थी मेधा
अजीत डोभाल का जन्म 20 जनवरी 1945 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में हुआ था। उनके पिता भारतीय सेना में अधिकारी थे, जिससे अनुशासन उन्हें विरासत में मिला। उनकी प्रारंभिक शिक्षा अजमेर के मिलिट्री स्कूल में हुई। इसके बाद, उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए आगरा विश्वविद्यालय का रुख किया, जहाँ से उन्होंने अर्थशास्त्र (Economics) में एमए की डिग्री प्रथम श्रेणी के साथ हासिल की।
UPSC और जांबाज IPS करियर
अपनी मेधावी बुद्धि और देश सेवा के जज्बे के कारण डोभाल ने यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की और 1968 बैच के केरल कैडर के IPS अधिकारी बने। पुलिस सेवा में आने के बाद उनकी कार्यशैली और खुफिया जानकारी जुटाने की कला ने उन्हें जल्द ही इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का हिस्सा बना दिया।
पाकिस्तान में 7 साल और वीरता का सर्वोच्च सम्मान
अजीत डोभाल के करियर के कई किस्से रोमांचक फिल्मों जैसे लगते हैं। वे करीब 7 साल तक पाकिस्तान में अंडरकवर एजेंट के तौर पर रहे, जहाँ उन्होंने अपनी पहचान छिपाकर भारत की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाईं।
-
ऑपरेशन ब्लैक थंडर: स्वर्ण मंदिर से आतंकियों को निकालने के लिए उन्होंने एक रिक्शा चालक बनकर मंदिर के भीतर की रेकी की थी।
-
कीर्ति चक्र: उनकी इन्हीं सेवाओं के लिए उन्हें ‘कीर्ति चक्र’ से सम्मानित किया गया। वे देश के पहले पुलिस अधिकारी हैं जिन्हें यह सैन्य सम्मान (जो आमतौर पर सेना के जवानों को मिलता है) दिया गया।
देश की सुरक्षा के अभेद्य कवच
2005 में इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक के पद से रिटायर होने के बाद, 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें देश का 5वां राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया। उनके कार्यकाल में भारत की विदेश और रक्षा नीति में एक नई ‘आक्रामकता’ देखी गई है, जिसे दुनिया ‘डोभाल डॉक्ट्रिन’ के नाम से जानती है।
आज अजीत डोभाल की कहानी हर उस युवा के लिए मिसाल है जो अपनी शिक्षा और अटूट संकल्प के बल पर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहता है।
