मुंबई में ‘कमल’ का ऐतिहासिक धमाका: BMC में पहली बार बनेगा BJP का मेयर

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मुंबई: मुंबई समेत महाराष्ट्र की 29 नगर महानगरपालिकाओं के चुनावी नतीजों ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। सबसे बड़ा उलटफेर देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में देखने को मिल रहा है, जहाँ पिछले कई दशकों से शिवसेना (अब ठाकरे गुट) का दबदबा था। ताजा आंकड़ों के अनुसार, बीजेपी पहली बार अपने दम पर मुंबई का मेयर बनाने की स्थिति में पहुंच गई है। ठाकरे भाइयों—उद्धव और राज ठाकरे—के लिए यह ‘प्रतिष्ठा की लड़ाई’ मानी जा रही थी, लेकिन नतीजों ने उनके समीकरण बिगाड़ दिए हैं।

वार्ड 19: शिवसेना का 20 साल पुराना ‘अजेय’ किला ढहा

उत्तर मुंबई को वैसे तो बीजेपी का गढ़ माना जाता है, लेकिन वार्ड नंबर 19 (कांदिवली-बोरीवली क्षेत्र) एक ऐसा अपवाद था जहाँ पिछले दो दशकों से केवल शिवसेना का भगवा लहराता था। इस बार बीजेपी की दीक्षा कवथंकर ने ठाकरे गुट की कद्दावर उम्मीदवार लीना सुभाष गुधेकर को हराकर सबको चौंका दिया है।

  • वफादारी की जंग: लीना गुधेकर की मां शुभदा गुधेकर यहाँ से तीन बार कॉर्पोरेटर रही थीं। वहीं, दीक्षा कवथंकर के पिता श्रीकांत कवथंकर भी कभी शिवसेना के पुराने वफादार थे, जिन्होंने 2017 में मतभेदों के चलते बीजेपी का दामन थाम लिया था। पिता की पुरानी पैठ और बीजेपी के नए आधार ने यहाँ इतिहास बदल दिया।

उत्तर मुंबई में बीजेपी का क्लीन स्वीप

कांदिवली, बोरीवली और मलाड जैसे इलाकों में बीजेपी को जबरदस्त कामयाबी मिली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन इलाकों में गुजराती, राजस्थानी और उत्तर भारतीय मतदाताओं की बड़ी आबादी ने बीजेपी के पक्ष में एकतरफा मतदान किया है, जिससे ठाकरे गुट के पारंपरिक मराठी वोट बैंक की पकड़ ढीली पड़ गई।

ताजा चुनावी स्थिति (दोपहर 3:45 बजे तक)

मुंबई महानगरपालिका की सीटों का रुझान/नतीजे इस प्रकार हैं:

पार्टी बढ़त/जीत (सीटें)
भारतीय जनता पार्टी (BJP) 92
शिवसेना (ठाकरे गुट – UBT) 60
शिवसेना (शिंदे गुट) 26
कांग्रेस 12
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) 09
राष्ट्रवादी कांग्रेस (NCP) 03
अन्य 08

ठाकरे ब्रदर्स के लिए खतरे की घंटी

यह चुनाव उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे दोनों के लिए अस्तित्व की लड़ाई जैसा था। जहाँ एक तरफ उद्धव ठाकरे अपनी विरासत बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, वहीं राज ठाकरे की मनसे (MNS) भी केवल 9 सीटों पर सिमटती दिख रही है। बीजेपी की यह बढ़त न केवल मुंबई, बल्कि पूरे महाराष्ट्र की आगामी राजनीति की दिशा तय करेगी।