ईरान में जनविद्रोह: 31 प्रांतों में भड़की हिंसा, अब तक 45 की मौत
तेहरान/दुबई | ईरान में धार्मिक सत्ता के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों ने अब एक विशाल जनविद्रोह का रूप ले लिया है। पिछले 12 दिनों से जारी इस अशांति की आग देश के सभी 31 प्रांतों और 100 से अधिक शहरों तक फैल चुकी है। तेहरान और मशहद जैसे प्रमुख शहरों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर सीधे तौर पर सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को हटाने और देश के अंतिम शाह के निर्वासित बेटे रजा पहलवी की वापसी के नारे लगाए हैं।
भारी खूनखराबा: बच्चों समेत दर्जनों की जान गई
विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई में भारी हताहतों की पुष्टि की है। संघर्ष की भयावहता को निम्नलिखित आंकड़ों से समझा जा सकता है:
| संगठन | मृतकों की संख्या (प्रदर्शनकारी) | बच्चों की मौत | सुरक्षाकर्मियों की मौत |
| ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) | 45+ | 08 | – |
| HRANA (अमेरिका स्थित) | 34 | 05 | 08 |
| बीबीसी फारसी (पुष्ट) | 22 | – | 06 |
अब तक 2,270 से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। चश्मदीदों के मुताबिक, देज़फुल जैसे शहरों में सुरक्षा बलों को सीधे भीड़ पर गोलियां चलाते देखा गया है।
आर्थिक बदहाली बनी विद्रोह की मुख्य वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विद्रोह की तात्कालिक वजह ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ का रिकॉर्ड स्तर तक गिरना है।
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महंगाई: देश में महंगाई की दर 40% के पार पहुंच चुकी है।
- अर्थव्यवस्था: अमेरिकी प्रतिबंधों, भ्रष्टाचार और सरकारी कुप्रबंधन ने आम जनता की कमर तोड़ दी है।
प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को तेहरान के दुकानदारों द्वारा की गई थी, लेकिन जल्द ही छात्र और आम नागरिक भी इसमें शामिल हो गए।
डिजिटल सेंसरशिप: पूरे देश में इंटरनेट बंद
प्रदर्शनों की खबरों को दुनिया तक पहुँचने से रोकने के लिए ईरानी अधिकारियों ने ‘डिजिटल वॉल’ खड़ी कर दी है। मॉनिटरिंग ग्रुप ‘नेटब्लॉक्स’ ने पुष्टि की है कि ईरान इस समय पूर्ण इंटरनेट ब्लैकआउट की स्थिति में है। सरकारी मीडिया इन प्रदर्शनों को या तो कम करके दिखा रहा है या खाली सड़कों के फुटेज दिखाकर शांति का दावा कर रहा है।
ट्रंप की सैन्य दखल की चेतावनी
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संकट ने तनाव बढ़ा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में ईरानी प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, “अगर उन्होंने लोगों को मारना शुरू किया, तो अमेरिका इसका बहुत करारा जवाब देगा।” ट्रंप ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई होने की स्थिति में अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप भी कर सकता है।
विपक्ष की लामबंदी और भविष्य की आहट
वॉशिंगटन में रह रहे रजा पहलवी ने अपने समर्थकों से एकजुट होकर सड़कों पर डटे रहने की अपील की है। प्रदर्शनों में “शाह ज़िंदाबाद” और “मौलवियों को जाना होगा” जैसे नारों ने 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद की सबसे बड़ी चुनौती पेश कर दी है। यह आंदोलन 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए प्रदर्शनों से भी अधिक व्यापक और आक्रामक नजर आ रहा है।
