बांग्लादेश में भारतीय नागरिकों के वर्क परमिट रद्द करो: इंकलाब मंच
हत्या के आरोपियों के भारत भागने के दावे पर ढाका में बवाल
बांग्लादेश में भड़की भारत विरोधी आग
ढाका | एजेंसी। बांग्लादेश में कट्टरपंथी संगठन ‘इंकलाब मंच’ के नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद पड़ोसी देश में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। इंकलाब मंच ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए चार सूत्री मांगों का अल्टीमेटम दिया है। संगठन ने मांग की है कि बांग्लादेश में काम कर रहे सभी भारतीय नागरिकों के वर्क परमिट तत्काल रद्द किए जाएं।
पुलिस का दावा: आरोपी भारत भागे
विवाद की जड़ ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी एस.एन. नजरुल इस्लाम का वह बयान है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि हादी की हत्या के मुख्य संदिग्ध—फैसल करीम मसूद और आलमगीर शेख—सीमा पार कर भारत के मेघालय राज्य में शरण ले चुके हैं। पुलिस का आरोप है कि 12 दिसंबर को हलुआघाट सीमा पार करने में दो भारतीयों ने उनकी मदद की। इस खुलासे के बाद बांग्लादेश में भारत विरोधी प्रदर्शनों ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया है।
इंकलाब मंच की चार कड़ी शर्तें
संगठन ने यूनुस प्रशासन के सामने जो अल्टीमेटम रखा है, उसमें निम्नलिखित मांगें शामिल हैं:
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24 घंटे की डेडलाइन: यदि 24 घंटे के भीतर आरोपियों को भारत से वापस नहीं लाया गया या उनकी स्थिति पर आधिकारिक बयान नहीं आया, तो देश में भारतीयों के वर्क परमिट रद्द हों।
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फास्ट ट्रैक ट्रायल: हादी की हत्या के मामले का ट्रायल 24 दिनों के भीतर पूरा किया जाए।
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ICJ में मामला: यदि भारत भगोड़ों को वापस नहीं सौंपता है, तो भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में मुकदमा दायर किया जाए।
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भीतरी ‘गद्दारों’ की पहचान: सैन्य और नागरिक खुफिया तंत्र में छिपे उन लोगों की पहचान हो जिन्होंने हत्या में मदद की।
देशव्यापी हिंसा और नाकाबंदी
शरीफ उस्मान हादी, जो अपने भारत विरोधी भाषणों के लिए चर्चित थे, की 13 दिसंबर को सिर में गोली लगने से मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद से ढाका का शाहबाग चौराहा अनिश्चितकालीन नाकाबंदी का केंद्र बना हुआ है। प्रदर्शनकारी न केवल सड़कों को ब्लॉक कर रहे हैं, बल्कि इमारतों में आगजनी, हिंदू अल्पसंख्यकों के घरों पर हमले और भारतीय समर्थक माने जाने वाले मीडिया संस्थानों को निशाना बना रहे हैं। प्रदर्शनों में महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं, जिससे अंतरिम सरकार के लिए कानून-व्यवस्था संभालना बड़ी चुनौती बन गया है।
