रेलवे स्टेशनों पर मैकडॉनल्ड्स, केएफसी और हल्दीराम जैसे बड़े ब्रांड्स की होगी एंट्री
नई दिल्ली | विशेष संवाददाता। भारतीय रेलवे अब अपने यात्रियों को सफर के दौरान विश्वस्तरीय खान-पान का अनुभव देने की तैयारी में है। जल्द ही देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर मैकडॉनल्ड्स, केएफसी, हल्दीराम, वाओ मोमो और बास्किन रॉबिंस जैसे दिग्गज ब्रांड्स के आउटलेट नजर आएंगे। रेलवे की इस नई पहल का उद्देश्य यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी प्रीमियम सुविधाएं प्रदान करना और अपने ‘गैर-किराया राजस्व’ (Non-fare Revenue) में इजाफा करना है।
2026 तक शुरू होंगे पहले आउटलेट
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, ‘कैटरिंग पॉलिसी 2017’ में किए गए हालिया संशोधनों के बाद प्रीमियम ब्रांड्स ने इसमें गहरी दिलचस्पी दिखाई है। उम्मीद जताई जा रही है कि 2026 की शुरुआत तक स्टेशनों पर ये प्रीमियम आउटलेट काम करना शुरू कर देंगे। इसके लिए सरकार 7,000 से अधिक स्टेशनों पर रेस्टोरेंट चेन को 5 साल का लाइसेंस देने के लिए ई-नीलामी प्रक्रिया शुरू करेगी।
एयरपोर्ट से ज्यादा बिक्री की उम्मीद
नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे स्टेशनों पर बिक्री का आंकड़ा एयरपोर्ट को भी पीछे छोड़ सकता है।
-
ज्यादा फुटफाल: एयरपोर्ट की तुलना में रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या कई गुना अधिक होती है।
-
किफायती लागत: एयरपोर्ट के मुकाबले स्टेशनों पर ‘एंट्री कॉस्ट’ कम है, जिससे कंपनियों को बेहतर मुनाफा होने की उम्मीद है।
-
डिमांड पैटर्न: एयरपोर्ट की तरह ही रेलवे स्टेशनों पर भी सॉफ्ट ड्रिंक, कॉफी और जूस जैसे ‘बेवरेज’ सेगमेंट में 70% तक राजस्व की संभावना देखी जा रही है।
उद्योग जगत की राय: “यह नीति इंडस्ट्री के लिए विकास का एक बड़ा इंजन साबित होगी। हर वर्ग और उम्र के लोग ट्रेनों से सफर करते हैं, जिससे यह ‘क्विक सर्विस रेस्टोरेंट’ (QSR) के लिए देश का सबसे बड़ा बाजार बन सकता है।” — प्रवक्ता, हल्दीराम
रेलवे की कमाई में होगा भारी इजाफा
वर्तमान में भारतीय रेलवे की कुल आय में ‘गैर-किराया राजस्व’ की हिस्सेदारी मात्र 3% है। नीति आयोग के अनुसार, विकसित देशों में यह हिस्सा 30% तक होता है।
-
FY24 का राजस्व: ₹588.07 करोड़
-
FY25 का राजस्व: ₹686.9 करोड़ नई नीति के लागू होने से न केवल राजस्व बढ़ेगा, बल्कि यात्रियों को गुणवत्तापूर्ण भोजन और बेहतर सर्विस भी सुनिश्चित होगी।
