स्पाईवेयर खतरे की चेतावनी पर केंद्र सख्त, Apple को नोटिस

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नई दिल्ली। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने टेक कंपनी Apple को नोटिस भेजा है। कारण—Apple ने भारत सहित कई देशों के यूजर्स को “Mercenary Spyware” यानी किराए के जासूसी सॉफ्टवेयर से खतरे की चेतावनी भेजी थी। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने इस मामले को बेहद गंभीर माना है और Apple से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। इसके साथ ही भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने एक सार्वजनिक सलाह जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने और चार जरूरी कदम तुरंत उठाने की अपील की है।

फोन तुरंत अपडेट करें: CERT-In की अपील

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, CERT-In ने कहा है कि जिन यूजर्स को Apple की तरफ से यह अलर्ट मिला है, वे तुरंत अपने आईफोन को अपडेट कर लें। यूजर्स अगर अपने डिवाइस की तकनीकी जांच करवाना चाहें, तो वे 📧 submitmobile@cert-in.org.in पर संपर्क कर सकते हैं। एजेंसी ने पुराने सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से बचने की सख्त सलाह दी है।

दूसरे दिन Google ने भी दिया अलर्ट

2 और 3 दिसंबर को Apple और Google ने दुनियाभर के कई यूजर्स को एक साथ चेतावनी भेजी। यह चेतावनी उन लोगों को मिली जिनके फोन पर किसी अत्यधिक सक्षम हमलावर या महंगे जासूसी सॉफ्टवेयर अथवा सरकार-प्रायोजित समूह द्वारा साइबर अटैक की कोशिश की गई थी। भारत में भी कई पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और सार्वजनिक व्यक्तियों को यह संदेश मिला है।

CERT-In ने जारी की 4 महत्वपूर्ण सलाह (CIAD-2025-0048)

1️⃣ तुरंत iOS 26.1 अपडेट इंस्टॉल करें।
2️⃣ क्लाउड और मैसेजिंग ऐप्स को भी अपडेट रखें।
3️⃣ अपने फोन में Lockdown Mode सक्रिय करें।
4️⃣ किसी भी संदिग्ध लिंक, मैसेज या पॉप-अप पर क्लिक न करें।

विशेषज्ञों की चेतावनी—ऐसे हमले और बढ़ेंगे

साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि अब इस तरह के जासूसी हमले पहले से कहीं अधिक आम हो रहे हैं। एस्या सेंटर की डायरेक्टर मेघना बाल ने कहा “महंगे स्पाईवेयर बेचने वाली कंपनियाँ दुनिया की साइबर सुरक्षा को कमजोर कर रही हैं। इन कमजोरियों का फायदा कोई भी विरोधी देश उठा सकता है।” उन्होंने सरकारों से आपसी सहयोग बढ़ाने और ऐसे सॉफ्टवेयर पर वैश्विक प्रतिबंध की वकालत की।

पहले भी हो चुका है विवाद

यह पहली बार नहीं है जब Apple के अलर्ट पर भारत ने आपत्ति जताई हो। 2023 में भी कई विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और एक्टिविस्टों को ऐसे ही संदेश मिले थे। उस समय Apple ने सरकार को बताया था कि ये अलर्ट उनके आंतरिक सिस्टम की चेतावनियों पर आधारित होते हैं। इनके जरिए किसी सरकार को दोषी ठहराना उद्देश्य नहीं होता

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