इंडिगो संकट पर प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया: “नियम जनता को परेशान करने के लिए नहीं होते”

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नई दिल्ली। इंडिगो संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को बेहद सख्त रुख अपनाया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि एनडीए सांसदों की बैठक में प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि सरकार द्वारा बनाए गए किसी भी नियम और प्रावधान से भारतीय नागरिकों को परेशानी नहीं होनी चाहिए।

पीएम मोदी ने कहा, “नियम व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए होते हैं, जनता को परेशान करने के लिए नहीं।” यह बैठक उस समय हुई जब संसद में निर्वाचन सुधारों पर बहस होनी है—ऐसा मुद्दा जो हाल ही में चुनाव आयोग की देशव्यापी वोटर री-वेरिफिकेशन प्रक्रिया के कारण और अधिक संवेदनशील हो गया है।

इंडिगो के खिलाफ सरकार का सख्त रुख

नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने संसद में स्पष्ट किया कि मंत्रालय इंडिगो के खिलाफ “उदाहरण प्रस्तुत करेगा” क्योंकि एयरलाइन की अव्यवस्था की वजह से लाखों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सरकार ने यह भी बताया कि अब तक इंडिगो 830 करोड़ रुपये से अधिक की रिफंड राशि जारी कर चुकी है, जबकि कंपनी के बाजार मूल्य में 37,000 करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई है।

शेड्यूलिंग प्रणाली चरमराई, 4,500 उड़ानें रद्द

इंडिगो संकट की जड़ में पायलटों और क्रू के ड्यूटी आवर्स और विश्राम अवधि से जुड़े नए नियमों का अनुपालन न कर पाना बताया जा रहा है। इन नियमों ने एयरलाइन की शेड्यूलिंग प्रणाली पर गहरा असर डाला। नतीजा—एक हफ्ते में करीब 4,500 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। हज़ारों यात्री एयरपोर्ट पर फंसे रहे, सोशल मीडिया गुस्से से भर गया और देशभर में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हुआ।

रिफंड और री-शेड्यूलिंग में भी दिक्कतें

इंडिगो ने प्रभावित यात्रियों को पूरा पैसा लौटाने और कैंसिलेशन व री-शेड्यूलिंग शुल्क माफ करने का भरोसा दिया है। लेकिन समस्या यह है कि 9.5 लाख से अधिक टिकटों की बुकिंग इस प्रक्रिया से जुड़ी है, जिसके चलते रिफंड में देरी, गलत प्रोसेसिंग, और ग्राहक शिकायतों में तेज़ बढ़ोतरी देखी जा रही है।

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