नीतीश कुमार को विश्व रिकॉर्ड की बधाई: 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी प्रशंसा मिली है। लंदन स्थित वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने पत्र जारी कर उन्हें बधाई दी है। संस्था ने इसे भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में अभूतपूर्व उपलब्धि बताया है। स्वतंत्रता के बाद से 2025 तक यह पहली बार है जब किसी व्यक्ति ने 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है।
वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने अपने पत्र में लिखा है कि यह उपलब्धि न केवल नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा की सफलता है, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण भी है। संस्था ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में उनके लगातार कार्यकाल से शासन, विकास, सामाजिक कल्याण और प्रशासनिक स्थिरता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता झलकती है।
संस्था ने किया सम्मानित करने का ऐलान
वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने कहा है कि वह जल्द ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम अपनी वैश्विक मान्यता सूची में शामिल करेगा और इसके लिए एक आधिकारिक प्रमाण पत्र प्रदान करेगा। संस्था ने इसे “दुर्लभ लोकतांत्रिक उपलब्धि” करार दिया है।
बिहार सरकार में खुशी, मंत्री रामकृपाल यादव का बयान
बिहार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा “मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह कार्यकाल अपने आप में एक रिकॉर्ड है। उनकी निष्ठा और कार्यकुशलता ने बिहार को नई दिशा दी है। यही वजह है कि जनता और जनप्रतिनिधि लगातार उन पर भरोसा जताते रहे हैं।” उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार विकास के नए चरण में प्रवेश कर रहा है।
तेजस्वी यादव पर भी साधा निशाना
इस बीच, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सदन में अनुपस्थित रहने पर मंत्री रामकृपाल यादव ने आलोचना की। उन्होंने कहा “नेता प्रतिपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, लेकिन तेजस्वी यादव सदन से गायब हैं। यह लोकतंत्र का अपमान है। जनता भविष्य में उन्हें इस जिम्मेदारी के योग्य नहीं मानेगी।” उन्होंने बढ़ते अपराधों पर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों को लेकर कहा कि विपक्ष को पहले अपने कार्यकाल का रिकॉर्ड सामने रखना चाहिए।
1974 में आजादी के बाद गिनी जा रही है उपलब्धि
नीतीश कुमार की इस उपलब्धि को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बिहार की राजनीति लंबे समय से अस्थिरता झेलती रही है। लगातार 10 बार मुख्यमंत्री पद तक पहुंचना न केवल उनकी राजनीतिक पकड़ को दिखाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर रहते हुए जनता का भरोसा बनाए रखा है।
