कुत्ते हमारे साथी हैं, समाधान मानवीय होना चाहिए
लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा आदेश के बाद देशभर में बढ़ी पशु-कल्याण से जुड़ी चिंताओं के बीच 16 नवंबर को मोती महल लॉन्स में “Lucknow Unites for Animal Rights 2.0” अभियान के तहत बड़ा जनसमूह एकत्र हुआ। यह आयोजन जानवरों के अधिकारों और मानवीय समाधान की मांग के समर्थन में किया गया। इससे पहले इस अभियान का पहला आयोजन अगस्त में इको पार्क में हुआ था, जहाँ भारी भीड़ उमड़ी थी।
11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली–एनसीआर के सभी कुत्तों को पकड़कर हटाने का निर्देश दिया था। इस आदेश के बाद देशभर में विरोध शुरू हुआ। बाद में मामला तीन न्यायाधीशों की पीठ को भेजा गया, जिसने 22 अगस्त को आदेश पर आंशिक रोक लगाई।
हालांकि 7 नवंबर 2025 को अदालत ने नया अंतरिम आदेश जारी किया, जिसमें स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों और स्टेडियम सहित कई सार्वजनिक स्थानों से कुत्तों को पकड़कर शेल्टर में भेजने का निर्देश दिया गया। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों से भी पशुओं को हटाने के आदेश दिए गए।
पशु-रक्षकों का कहना है कि यह आदेश व्यावहारिक, कानूनी और मानवीय—तीनों दृष्टियों से गंभीर सवाल उठाता है।
शांतिपूर्ण जन-आंदोलन
समारोह में डॉक्टर, वकील, व्यवसायी, कलाकार, पत्रकार, शिक्षाविद, मनोवैज्ञानिक, कार्यकर्ता, गृहणियां, वरिष्ठ नागरिक, विद्यार्थी और बच्चे शामिल हुए। सभी ने मिलकर पशुओं को पीड़ा से बचाने और वैज्ञानिक समाधान अपनाने की मांग की।
देशभर से आ रही खबरों—जैसे दिल्ली, हैदराबाद और मेरठ में कुत्तों को बिना प्रक्रिया के पकड़े जाने—ने लोगों में भारी चिंता पैदा की है।
मुख्य मुद्दे :
डॉग बाइट डेटा पर अविश्वास
अखबारों, नगर निकायों और संसदीय रिकॉर्ड में बाइट केसों के आंकड़े एक-दूसरे से मेल नहीं खाते।
व्यवहार की समझ की कमी
कुत्तों द्वारा वाहन का पीछा करना अक्सर पिछले ट्रॉमा या डर का परिणाम होता है, न कि आक्रामकता।
सार्वजनिक भावना
यह मुद्दा “डॉग लवर्स बनाम डॉग हेटर्स” नहीं है— सभी चाहते हैं कि कुत्तों को अनावश्यक पीड़ा न हो। मतभेद सिर्फ समाधान पर हैं।
प्रमुख मांगें
● 07.11.2025 के आदेश को वापस लेकर पुनर्विचार किया जाए।
● सुप्रीम कोर्ट NGO, AWBI, कानूनी विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं सहित सभी पक्षों को सुने।
● पर्यावरणीय प्रभाव अध्ययन कराया जाए।
● PCA Act 1960, ABC Rules 2023 और पूर्ववर्ती कोर्ट आदेशों का पालन किया जाए।
सुझाव
- ABC Rules 2023 का सख्ती से पालन – नसबंदी, टीकाकरण और क्षेत्र में पुनर्वापसी।
- बड़े पैमाने पर शेल्टर बनाना अव्यवहारिक–कुत्तों के लिए हानिकारक।
- मीडिया में भय फैलाने वाली खबरों पर रोक।
- जागरूकता कार्यक्रम – सही भोजन, टीकाकरण, बाइट-रोकथाम शिक्षा।
- इंडी डॉग एडॉप्शन और ब्रीडिंग कंट्रोल को बढ़ावा।
डॉ. विशाखा शुक्ला ने कहा कि “जहाँ शेल्टर हैं ही नहीं, वहाँ जानवरों को भेजना अव्यवहारिक फैसला है। अंत में पीड़ित कुत्ते ही होंगे।”
कुमुद त्रिवेदी ने कहा कि “ग्रामीण स्कूलों में शौचालय तक नहीं हैं, वहाँ ढांचागत बदलाव कैसे संभव है?”
राखी किशोरने कहा कि “रेबीज़ नियंत्रण का असली उपाय — ABC और टीकाकरण। इसे लागू न कर पाना नगर निगम की असफलता है।”
डॉ. विवेक बिस्वास ने कहा कि “रेबीज़ सिर्फ डॉग-बाइट से नहीं होता। जैकल, बंदर, भेड़िए भी स्रोत हैं।”
डॉ. अंशुमान त्यागी ने कहा कि “हर वैक्सीन डोज़ को बाइट केस मानना गलत है—इसीलिए आंकड़े बढ़े हुए दिखते हैं।”
विशाखा चटर्जी ने कहा कि “मीडिया को डर नहीं, सच्चाई दिखानी चाहिए।”
डॉ. सौरभ नंदवंशी ने कहा कि “डर–हिंसा–बाइट का चक्र तोड़ना जरूरी है।”
प्रीति एम. शाह ने कहा कि “धर्म, संस्कृति और करुणा—कुत्तों की रक्षा हमारी परंपरा का हिस्सा है।”
अमृता चक्रवर्ती ने कहा कि “हमारी सभ्यता का स्तर इस बात से तय होता है कि हम सबसे कमजोरों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं।”
