जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकवादी गिरफ्तार

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लखनऊ, उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के दो सदस्यों को सहारनपुर के देवबंद में गिरफ्तार किया है।

पकड़े गये दोनों आतंकवादी स्थानीय युवाओं को बरगलाकर जैश-ए-मोहम्मद में भर्ती करने के अभियान के तहत उत्तर प्रदेश आये थे।

पुलिस महानिदेशक ओम प्रकाश सिंह ने आज यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, ‘‘उत्तर प्रदेश एटीएस को दो दिन पहले सूचना मिली थी कि देवबंद में कुछ युवक बिना दाखिले के छात्र बनकर आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के लिए युवाओं की भर्ती कर रहे हैं। सर्विलांस की मदद से उनकी पड़ताल की गई तो शक और मजबूत हो गया।’’

सिंह ने बताया, ‘‘कल शाम एटीएस के महानिरीक्षक असीम अरुण को मौके पर भेजा गया। तब उन संदिग्धों के बारे में जानकारी पुख्ता हो गई। पूरी तरह जांच परख करने के बाद कल रात दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।’’ उन्होंने बताया कि पकड़े गए युवकों के कमरे की तलाशी लेने पर उनके मोबाइल फोन से तथाकथित जिहादी ऑनलाइन चैट, वीडियो और तस्वीरें बरामद की गई हैं। अधिकारी ने बताया कि इनका गहन परीक्षण किया जा रहा है। इसके अलावा दो पिस्तौल और 30 कारतूस भी मौके से मिले हैं।

पुलिस महानिदेशक ने बताया कि शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि शाहनवाज और आकिब जैश-ए-मोहम्मद के सक्रिय सदस्य हैं और दोनों को इस तंजीम में नए सदस्यों की भर्ती के लिए उत्तर प्रदेश भेजा गया था।

शाहनवाज जम्मू कश्मीर के कुलगाम का रहने वाला है। वहीं उसका साथी आकिब अहमद पुलवामा का निवासी है। पूछताछ में मालूम हुआ है कि शाहनवाज हैंड ग्रेनेड बनाने और चलाने में माहिर होने के साथ-साथ आतंकवाद का प्रशिक्षण भी देता है। वह खुद को विद्यार्थी बता कर देवबंद के स्थानीय विद्यार्थियों को गुमराह करके उन्हें जैश-ए-मोहम्मद के लिए काम करने को प्रेरित करता था।

पुलिस महानिदेशक ने बताया, ‘‘पकड़े गए दोनों संदिग्ध आतंकवादियों की उम्र 20 से 25 साल के बीच है। दोनों को ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाकर एटीएस अदालत में पेश किया जाएगा और पुलिस रिमांड की गुजारिश की जाएगी। यह जानने की कोशिश की जाएगी कि ये दोनों उत्तर प्रदेश में कब आये, उनके साथी कौन—कौन हैं और उनकी क्या गतिविधियां रही हैं।’’

उन्होंने बताया कि इस बात की भी जांच की जाएगी, ‘‘दोनों ने उत्तर प्रदेश में कितने युवाओं को अपने संगठन में भर्ती किया है और दोनों का निशाना क्या था। उनका वित्त पोषण कौन कर रहा था, और क्या पिछली 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकवादी संगठन हमले में दोनों का कोई हाथ था या नहीं। हम जम्मू—कश्मीर पुलिस के भी सम्पर्क में हैं।’’

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