जनगणना 2027: आजादी के बाद पहली बार जनगणना में पूछी जाएगी जाति

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India Census 2027_ Caste Enumeration

नई दिल्ली। भारत में होने वाली जनगणना 2027 कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रही है। इस बार जनसंख्या की गणना के साथ सभी जातियों से संबंधित जानकारी भी एकत्र की जाएगी। आजादी के बाद पहली बार जनगणना में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के अलावा अन्य जातियों की भी व्यापक गणना की जाएगी। केंद्र सरकार के इस फैसले से देश में जातिगत संरचना से जुड़े आंकड़े सामने आने की उम्मीद है।

जनगणना में जाति से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे

जनगणना 2027 के दूसरे चरण में नागरिकों से उनकी जाति सहित विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय जानकारियां एकत्र की जाएंगी। सरकार ने जनसंख्या गणना के लिए 40 सवालों वाली प्रश्नावली अधिसूचित की है। इसमें व्यक्ति की उम्र, वैवाहिक स्थिति, धर्म, जाति, शिक्षा, रोजगार और प्रवास से संबंधित सवाल शामिल हैं।

जाति से जुड़ी जानकारी प्रश्नावली का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। इससे विभिन्न समुदायों की जनसंख्या और सामाजिक संरचना के बारे में विस्तृत आंकड़े जुटाने में मदद मिलेगी।

1931 के बाद जातिगत आंकड़ों पर फिर जोर

भारत में जातियों की व्यापक गणना का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रहा है। वर्ष 1931 की जनगणना को स्वतंत्रता से पहले सभी जातियों से संबंधित विस्तृत आंकड़ों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। आजादी के बाद नियमित जनगणना में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की गणना की जाती रही, जबकि अन्य जातियों की व्यापक गणना नियमित जनगणना का हिस्सा नहीं थी।

अब जनगणना 2027 में सभी जातियों को शामिल करने के फैसले से इस दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। जातिगत आंकड़े सार्वजनिक होने के बाद सामाजिक प्रतिनिधित्व, विकास योजनाओं और विभिन्न समुदायों की स्थिति को लेकर चर्चा को नए तथ्य मिल सकते हैं।

दो चरणों में होगी जनगणना

जनगणना 2027 की प्रक्रिया दो चरणों में आयोजित की जा रही है।

पहला चरण: मकानों की सूची तैयार करना और आवासीय सुविधाओं से संबंधित जानकारी जुटाना। इस चरण में घरों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और घरेलू परिसंपत्तियों से संबंधित विवरण एकत्र किए जाते हैं।

दूसरा चरण: जनसंख्या की गणना करना। इसमें प्रत्येक व्यक्ति की सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय जानकारी जुटाई जाएगी। जातिगत गणना भी इसी चरण का हिस्सा होगी।

डिजिटल माध्यम से जुटाई जाएगी जानकारी

जनगणना 2027 भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी। इसके तहत आंकड़े एकत्र करने के लिए डिजिटल उपकरणों और मोबाइल आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। नागरिकों को निर्धारित अवधि में ऑनलाइन स्व-गणना की सुविधा भी दी जाएगी।

केंद्र सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। डिजिटल व्यवस्था से आंकड़ों के संग्रह, प्रबंधन और विश्लेषण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सरकारी योजनाओं और नीतियों पर पड़ सकता है असर

जनगणना से प्राप्त आंकड़े सरकार को देश की जनसंख्या और सामाजिक संरचना समझने में मदद करते हैं। जातियों से संबंधित विस्तृत आंकड़े विभिन्न समुदायों की स्थिति का अध्ययन करने और नीतिगत चर्चाओं के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य में कौन-से नीतिगत निर्णय लिए जाएंगे, यह सरकार के निर्णयों और संबंधित प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा। जनगणना का वास्तविक महत्व इसके विश्वसनीय आंकड़ों और उनके उचित उपयोग में होगा।

 

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