राहुल-अखिलेश के बीच नहीं दिखी पहले जैसी गर्मजोशी!
नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मंगलवार को दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन में राहुल गांधी और अखिलेश यादव एक मंच पर तो नजर आए, लेकिन दोनों के बीच पहले जैसी राजनीतिक गर्मजोशी दिखाई नहीं दी।
मार्च में साथ, लेकिन एक कतार का फासला
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी सांसदों के मार्च में राहुल गांधी सबसे आगे नजर आए, जबकि अखिलेश यादव सपा सांसदों के साथ उनसे एक कतार पीछे चलते दिखे। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच पहले दिखाई देने वाली सहजता और नजदीकी कम नजर आई।
यह प्रदर्शन SIR यानी Special Intensive Revision के मुद्दे और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की विपक्षी मांग को लेकर था। दिल्ली पुलिस ने मार्च को चुनाव आयोग कार्यालय से करीब 400 मीटर पहले बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया था।
2024 वाली केमिस्ट्री पर फिर चर्चा
राहुल गांधी और अखिलेश यादव को 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश में साथ प्रचार करते हुए काफी प्रमुखता मिली थी। दोनों नेताओं की संयुक्त रैलियों और चुनावी कार्यक्रमों को ‘यूपी के दो लड़कों’ की जोड़ी के तौर पर भी पेश किया गया था।
लेकिन अब आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और सपा के बीच बातचीत महत्वपूर्ण हो गई है। कांग्रेस की प्रदेश इकाई अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर रही है, जबकि सपा अपने स्तर पर चुनावी तैयारियों में जुटी है।
INDIA ब्लॉक की बैठक से भी दूर रहे अखिलेश
30 सितंबर को दिल्ली में हुई INDIA ब्लॉक की एक अहम बैठक में भी अखिलेश यादव शामिल नहीं हुए थे। उनकी जगह सपा की ओर से दूसरे नेताओं को प्रतिनिधित्व के लिए भेजा गया था। इसे कांग्रेस-सपा संबंधों के संदर्भ में राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि दोनों दलों ने गठबंधन खत्म होने की कोई घोषणा नहीं की है।
सीट बंटवारा बना अहम मुद्दा
उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों को लेकर दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग आने वाले दिनों में बड़ा मुद्दा बन सकती है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम पहले ही अधिक सीटों पर दावा जता चुके हैं और अक्टूबर में सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने की बात कही गई है।
फिलहाल कांग्रेस और सपा दोनों ही गठबंधन को लेकर सार्वजनिक तौर पर अलग होने का संकेत नहीं दे रहे हैं। ऐसे में दिल्ली के प्रदर्शन में नेताओं की स्थिति और आपसी दूरी को लेकर उठ रही चर्चाएं राजनीतिक संकेतों और विश्लेषण तक सीमित हैं, इसे गठबंधन टूटने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
दिल्ली के प्रदर्शन ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच मौजूदा राजनीतिक समीकरण को लेकर नई चर्चा जरूर छेड़ दी है। असली तस्वीर उत्तर प्रदेश में सीट बंटवारे और आने वाले चुनावी फैसलों से ज्यादा स्पष्ट होगी।
