गांधीनगर में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था स्टाफ की कमी से जूझ रही, कई अहम पद खाली

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गांधीनगर। गुजरात की राजधानी गांधीनगर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और शुद्धता की निगरानी करने वाली व्यवस्था खुद ही कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है। बाजार में बिक रहे आटा, तेल, घी और अन्य खाद्य पदार्थों की नियमित जांच और सैंपलिंग का जिम्मा सीमित अधिकारियों के भरोसे चल रहा है, जिससे खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार जिले स्तर पर खाद्य सुरक्षा विभाग में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के कुल चार स्वीकृत पद हैं, जिनमें से दो पद वर्तमान में खाली पड़े हैं। जनवरी में दो अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने के बाद विभाग में केवल दो खाद्य सुरक्षा अधिकारी ही कार्यरत हैं। ऐसे में लाखों लोगों के भोजन की सुरक्षा का जिम्मा आधे स्टाफ के कंधों पर आ गया है।

गांधीनगर में खाद्य सुरक्षा विभाग का संचालन स्वास्थ्य प्रशासन द्वारा किया जाता है। विभाग की जिम्मेदारी खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच, सैंपलिंग, निरीक्षण और मिलावट पर कार्रवाई करना है, लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण इन कार्यों पर असर पड़ रहा है।

स्थिति केवल खाद्य सुरक्षा विभाग तक सीमित नहीं है। जिले में ड्रग इंस्पेक्टर के कुल पांच स्वीकृत पद हैं, जिनमें से तीन पद खाली पड़े हैं। इसके कारण दवाओं की गुणवत्ता और औषधि प्रतिष्ठानों की निगरानी भी प्रभावित होने की आशंका है।

वहीं, गांधीनगर महानगरपालिका (GMC) में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के 12 स्वीकृत पद हैं, लेकिन सभी पद वर्तमान में खाली हैं। ऐसे में शहरी क्षेत्र में खाद्य प्रतिष्ठानों की निगरानी और जांच का काम भी सीमित संसाधनों के सहारे चल रहा है।

चिंता की बात यह है कि त्योहारों और व्रत के मौसम में खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के साथ मिलावट की आशंकाएं भी बढ़ जाती हैं। इसके बावजूद हाल के समय में खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच और सैंपलिंग की गति अपेक्षित स्तर पर नहीं दिखाई दे रही है।

हर वर्ष खाद्य जनित बीमारियों और मिलावटी खाद्य पदार्थों से जुड़े मामले सामने आते रहते हैं।

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