भारत-अमेरिका ट्रेड डील: क्या है टैरिफ और कैसे इस समझौते से चमकेगी भारतीय अर्थव्यवस्था?
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए नए व्यापार समझौते ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। इस डील के तहत अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए टैरिफ (Tariff) में बड़ी कटौती की गई है, जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार और निर्यातकों पर सकारात्मक रूप से दिख रहा है।
क्या होता है टैरिफ? (What is Tariff?)
आसान शब्दों में कहें तो टैरिफ वह टैक्स या ‘आयात शुल्क’ है जो कोई भी देश दूसरे देश से आने वाले सामान पर लगाता है।
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उद्देश्य: इसका मुख्य मकसद घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाना होता है। जब बाहर से आने वाला सामान टैरिफ के कारण महंगा हो जाता है, तो लोग स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं।
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राजस्व का स्रोत: यह सरकार की कमाई का भी एक बड़ा जरिया है, जिससे विकास योजनाओं को फंड किया जाता है।
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कूटनीतिक हथियार: कई बार देश इसे रणनीतिक हथियार के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं।
भारत-अमेरिका डील की बड़ी बातें:
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टैरिफ में भारी कटौती: इस समझौते के तहत भारतीय सामानों पर लगने वाला अतिरिक्त आयात शुल्क (Additional Duty) हटाया जा रहा है। अमेरिका ने भारत पर लगे अतिरिक्त 25% टैरिफ को घटाकर 18% करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
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रूस से तेल आयात का असर: अमेरिका ने यह राहत तब दी है जब भारत ने रूस से तेल का आयात कम किया है। जनवरी में यह घटकर करीब 12 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इससे रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने में मदद मिलेगी।
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शेयर बाजार में तेजी: ट्रेड डील की खबरों के बाद भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल देखा गया है, जो निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।
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पड़ोसियों पर बढ़त: चीन और पाकिस्तान के मुकाबले भारत को मिलने वाली यह टैरिफ राहत उसे वैश्विक निर्यात बाजार में एक बड़ी बढ़त दिलाएगी।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव:
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल आज संसद में इस समझौते को लेकर विस्तृत बयान दे सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील से भारत के कपड़ा (Textiles), रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewellery) और इंजीनियरिंग क्षेत्रों को जबरदस्त फायदा होगा, क्योंकि अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान अब पहले से सस्ता और प्रतिस्पर्धी होगा।
