पशु प्रेमियों में आक्रोश, लखनऊ में बुलाई गई इमरजेंसी मीटिंग
लखनऊ | सामुदायिक कुत्तों (Community Dogs) के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अचानक सुनवाई बंद कर फैसला सुरक्षित रखने के तरीके ने देशभर के पशु अधिकार कार्यकर्ताओं को चिंता में डाल दिया है। इसी कड़ी में बीती रात लखनऊ के पशु कार्यकर्ताओं ने बिना किसी औपचारिक बैनर के एक आपातकालीन बैठक आयोजित की।
बिना स्पष्टीकरण सुनवाई बंद करने पर नाराजगी
बैठक में कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कोर्ट ने पशु अधिकार कार्यकर्ताओं की पुनर्विचार याचिकाओं और रिव्यू पर गौर किए बिना ही सुनवाई को विराम दे दिया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें अपना पक्ष रखने या स्पष्टीकरण देने का उचित मौका नहीं दिया गया, जो न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
“तथाकथित पशु प्रेमी” जैसे शब्दों पर आपत्ति
कानूनी विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं ने कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बैठक में चर्चा हुई कि:
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“तथाकथित पशु प्रेमी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल और जानवरों के व्यवहार पर विज्ञान के विपरीत टिप्पणियां चिंताजनक हैं।
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सुनवाई के लिए फीस लेने जैसी प्रक्रिया की भी आलोचना की गई, जिसका कोई ठोस कानूनी आधार नहीं दिखता।
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शेल्टर और पाउंड बनाने पर कोर्ट के अत्यधिक जोर को अमानवीय और मौजूदा कानूनों के खिलाफ बताया गया।
“लगातार विरोध प्रदर्शन” का ऐलान
नाम न छापने की शर्त पर एक कार्यकर्ता ने कहा, “स्थायी शेल्टर और पाउंड का समाधान हमें मंजूर नहीं है। यह क्रूर और अमानवीय है।” कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि वे न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन संविधान के खिलाफ किसी भी आदेश को स्वीकार नहीं करेंगे।
लखनऊ के पूजा सिंह, राखी किशोर, डॉ विशाखा शुक्ला, विशाखा चटर्जी, डॉ विवेक, नेहा तपस्या, अमृता कार्यकर्ताओं ने निर्णय लिया है कि जब तक यह आदेश वापस नहीं लिया जाता, वे ‘लगातार विरोध प्रदर्शन’ जारी रखेंगे। खबर है कि इसी तरह की बैठकें देश के अन्य प्रमुख शहरों में भी आयोजित की गई हैं, जिससे यह आंदोलन अब राष्ट्रव्यापी रूप लेता दिख रहा है।
