आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट: योग्यता बनाम रियायत, कब मिलेगी जनरल सीट और कब नहीं?

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सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 की शुरुआत में सरकारी नौकरियों और आरक्षण के नियमों को लेकर दो बेहद महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं। ये दोनों फैसले उम्मीदवारों के लिए ‘योग्यता’ (Merit) और ‘आरक्षण’ (Reservation) के बीच के बारीक अंतर को स्पष्ट करते हैं।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दो अलग-अलग मामलों में आरक्षण और ओपन कैटेगरी (General Category) को लेकर ऐतिहासिक रुख साफ किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जहाँ एक ओर ‘जनरल कैटेगरी’ कोई सुरक्षित कोटा नहीं है, वहीं दूसरी ओर ‘आरक्षित वर्ग’ के वे उम्मीदवार जिन्होंने किसी भी स्तर पर रियायत ली है, वे जनरल सीट पर दावा नहीं कर सकते।

1. राजस्थान भर्ती मामला: “ओपन कैटेगरी कोई कोटा नहीं है”

जनवरी 2026 में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने राजस्थान की एक सरकारी भर्ती के मामले में मील का पत्थर साबित होने वाला फैसला सुनाया।

  • फैसला: बेंच ने कहा कि ‘ओपन’ या ‘अनारक्षित’ श्रेणी किसी विशिष्ट जाति या वर्ग के लिए ‘आरक्षित’ नहीं है। यह पूरी तरह से मेरिट पर आधारित है।

  • संवैधानिक आधार: कोर्ट ने कहा कि अगर किसी आरक्षित श्रेणी (SC/ST/OBC/EWS) के उम्मीदवार ने जनरल कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, तो उसे ओपन श्रेणी की सीट मिलनी चाहिए। उसे सिर्फ इसलिए बाहर नहीं किया जा सकता क्योंकि वह आरक्षित वर्ग से है। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

  • महत्व: कोर्ट ने भर्ती अधिकारियों को निर्देश दिया कि सबसे पहले ‘मेरिट लिस्ट’ पूरी तरह से अंकों के आधार पर तैयार की जानी चाहिए, चाहे उम्मीदवार किसी भी श्रेणी का हो।

2. IFS मामला: “रियायत लेने के बाद जनरल सीट पर दावा नहीं”

ठीक इसी समय, सुप्रीम कोर्ट की एक दूसरी बेंच (जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई) ने भारतीय वन सेवा (IFS) के एक मामले में महत्वपूर्ण सीमा तय की।

मामला क्या था?

एक एससी (SC) वर्ग के उम्मीदवार ने 2013 की आईएफएस प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षित वर्ग के कम कट-ऑफ का लाभ उठाया था। जनरल कट-ऑफ 267 था, जबकि उन्होंने 247.18 अंक पाकर एससी कोटे (कट-ऑफ 233) के माध्यम से मुख्य परीक्षा में प्रवेश किया। बाद में ज्यादा नंबर आने पर उन्होंने ‘जनरल कैडर’ की मांग की।

कोर्ट की टिप्पणी:

  • नियम: कोर्ट ने साफ किया कि यदि किसी अभ्यर्थी ने आयु (Age), शुल्क (Fee) या प्रारंभिक परीक्षा के कट-ऑफ में ‘रिलैक्स्ड स्टैंडर्ड’ (रियायत) का लाभ लिया है, तो वह पूरी चयन प्रक्रिया के लिए आरक्षित वर्ग का ही माना जाएगा।

  • निष्कर्ष: एक बार आरक्षण का लाभ (कंसीशन) लेने के बाद, वह उम्मीदवार जनरल या ओपन कैटेगरी की रिक्तियों के लिए ‘जनरल स्टैंडर्ड’ का उम्मीदवार नहीं रह जाता, भले ही उसके अंतिम अंक जनरल कट-ऑफ से ज्यादा क्यों न हों।

दोनों फैसलों का सार (Candidate Guide)

इन फैसलों के बाद अब नियम बिल्कुल स्पष्ट हैं:

परिस्थिति परिणाम
केस A: आपने कोई रियायत (Age/Fee/Prelims Cut-off) नहीं ली और आपके मार्क्स जनरल कट-ऑफ से ज्यादा हैं। आपको जनरल/ओपन सीट मिलेगी।
केस B: आपने किसी भी स्तर पर रियायत ली है और आपके मार्क्स जनरल कट-ऑफ से ज्यादा हैं। आपको केवल आरक्षित (Reserved) सीट ही मिलेगी।

सुप्रीम कोर्ट के ये फैसले सुनिश्चित करते हैं कि जहाँ मेधावी छात्रों को उनकी श्रेणी के बावजूद समान अवसर मिले, वहीं आरक्षण की प्रक्रिया का दुरुपयोग न हो।

 

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