Zomato-Blinkit ने रचा इतिहास: न्यू ईयर पर हुई 75 लाख से ज्यादा रिकॉर्ड डिलीवरी!

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Zomato-Blinkit

नई दिल्ली: देश में गिग वर्कर्स की हड़ताल की धमकियों और विरोध प्रदर्शनों के बावजूद, फूड डिलीवरी दिग्गज ज़ोमैटो (Zomato) और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट (Blinkit) ने नए साल की पूर्व संध्या (31 दिसंबर) पर सफलता के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। कंपनी के फाउंडर और सीईओ दीपेंद्र गोयल ने सोशल मीडिया पर इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी साझा की है।

आंकड़ों में रिकॉर्ड तोड़ सफलता

दीपेंद्र गोयल के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 की रात दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम का दबाव पिछले सभी सालों के मुकाबले कहीं अधिक था:

  • कुल ऑर्डर्स: 75 लाख से ज्यादा रिकॉर्ड डिलीवरी की गईं।

  • ग्राहक: 63 लाख से अधिक ग्राहकों ने अपनी पसंद का खाना और सामान ऑर्डर किया।

  • डिलीवरी पार्टनर्स: 4.5 लाख से ज्यादा पार्टनर्स दिन भर काम पर डटे रहे।

  • हैरान करने वाली बात: गोयल ने दावा किया कि यह सब डिलीवरी पार्टनर्स को बिना किसी ‘एक्स्ट्रा इंसेंटिव’ दिए संभव हुआ।

“सिस्टम गलत होता तो लोग नहीं जुड़ते” – दीपेंद्र गोयल

हड़ताल की धमकियों पर निशाना साधते हुए दीपेंद्र गोयल ने कहा कि अगर यह सिस्टम वाकई गलत या शोषणकारी होता, तो इतने लाख लोग इससे नहीं जुड़ते। उन्होंने पोस्ट में लिखा: “कृपया निहित स्वार्थों (Vested Interests) द्वारा फैलाई जा रही बातों में न फंसें। गिग इकॉनमी भारत के सबसे बड़े संगठित रोजगार सृजन इंजनों में से एक बनकर उभरी है। इसका असली असर तब दिखेगा जब इन पार्टनर्स के बच्चे बेहतर शिक्षा और आय की मदद से देश की वर्कफोर्स का हिस्सा बनेंगे।”

हड़ताल का क्या था मामला?

बता दें कि ‘गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन’ ने 31 दिसंबर को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया था। उनकी मांगें काम करने की स्थिति, अधिकारों और सम्मान को लेकर थीं। हालांकि, गोयल ने स्पष्ट किया कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन के सहयोग से “मुट्ठी भर बदमाशों” को काबू में रखा गया, जिससे काम बाधित नहीं हुआ।

गिग इकॉनमी और भविष्य

न्यू ईयर के इन आंकड़ों से साफ है कि भारत में ऑनलाइन डिलीवरी अब एक जरूरत बन चुकी है। जहां एक तरफ कंपनियां रिकॉर्ड तोड़ मुनाफे और ऑर्डर्स की बात कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ डिलीवरी पार्टनर्स की यूनियनें अपनी मांगों पर अड़ी हैं। दीपेंद्र गोयल ने उन पार्टनर्स का आभार जताया जिन्होंने “ईमानदार काम और तरक्की” को चुना।

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