फॉरेंसिक साइंस: जानें स्कोप, कोर्स और नौकरी के विकल्प
अगर आप क्राइम थ्रिलर फ़िल्मों या ओटीटी सीरीज़ के शौकीन हैं, तो आपने देखा होगा कि किसी अपराध की गुत्थी सुलझाने में एक बाल, फिंगरप्रिंट, नाख़ून का कण या मोबाइल फोन में मिला एक मैसेज तक कैसे बड़ा सबूत बन जाता है। इन्हीं सुरागों को इकट्ठा करके वैज्ञानिक तरीके से पढ़ने-समझने का काम फॉरेंसिक साइंस (Forensic Science) करता है—एक ऐसा क्षेत्र जो साइंस, लॉजिक और टेक्नोलॉजी पर आधारित है। भारत में अपराध के बढ़ते मामलों और भारतीय न्याय संहिता (BNS) में फॉरेंसिक सबूतों को अनिवार्य करने के बाद, इस क्षेत्र में नौकरी के अवसर तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
क्या है फॉरेंसिक साइंस?
फॉरेंसिक साइंटिस्ट वह विशेषज्ञ होते हैं जो किसी अपराध स्थल (Crime Scene) से मिले सबूतों का वैज्ञानिक विश्लेषण करते हैं। इनकी रिपोर्ट पुलिस, वकीलों, जांच एजेंसियों और अदालत को यह समझने में मदद करती है कि अपराध कैसे और कब हुआ।
फॉरेंसिक एक्सपर्ट कहां काम करते हैं?
फॉरेंसिक साइंस एक बड़ा क्षेत्र है और एक्सपर्ट्स कई सरकारी व प्राइवेट संस्थानों में काम कर सकते हैं:
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सेंट्रल/स्टेट फॉरेंसिक लैब (CFSL/FSL)
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क्राइम इनवेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID)
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इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB)
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सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (CBI)
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पुलिस विभाग
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साइबर क्राइम सेल
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कोर्ट लैब
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प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसियां
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रिसर्च संस्थान
भारत में फॉरेंसिक साइंस कहां पढ़ें?
देश में कई प्रतिष्ठित संस्थान फॉरेंसिक साइंस की पढ़ाई कराते हैं:
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नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (NFSU)
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इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस, मुंबई
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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU)
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उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद
NFSU के विभिन्न राज्यों में कैंपस हैं और इनके लिए अलग कॉमन एंट्रेंस टेस्ट होता है। इसके अलावा कई प्राइवेट विश्वविद्यालयों में भी यह कोर्स उपलब्ध है।
फॉरेंसिक साइंस की प्रमुख ब्रांचें
फॉरेंसिक साइंस कई सब-फील्ड में बंटी होती है, जैसे:
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फॉरेंसिक बायोलॉजी – DNA, खून, बाल जैसे जैविक नमूनों का विश्लेषण
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फॉरेंसिक केमिस्ट्री – ड्रग्स, केमिकल व विस्फोटकों की जांच
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फॉरेंसिक पैथोलॉजी – मौत का कारण और समय जानने के लिए शरीर का अध्ययन
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फॉरेंसिक टॉक्सिकोलॉजी – शरीर में ज़हर या ड्रग्स की पहचान
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डिजिटल फॉरेंसिक – साइबर अपराध और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच
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फॉरेंसिक एंथ्रोपोलॉजी – कंकाल/अवशेषों से पहचान और मौत का विश्लेषण
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फॉरेंसिक ओडॉन्टोलॉजी – दांतों से जुड़े सबूतों की जांच
कोर्स में एडमिशन के लिए क्या योग्यता चाहिए?
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12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी/मैथ्स जरूरी
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12वीं में कम से कम 50% अंक
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कुछ संस्थान अपनी प्रवेश परीक्षा भी कराते हैं
लेकिन योग्यता से ज्यादा जरूरी है—क्या यह क्षेत्र आपके लिए सही है?
कौन लोग इस फील्ड के लिए उपयुक्त हैं?
एमिटी यूनिवर्सिटी की रिसर्चर सिमरन ठाकुर के अनुसार फॉरेंसिक साइंस में तीन स्किल बेहद महत्वपूर्ण हैं:
तेज ऑब्ज़रवेशन स्किल
हर छोटी-बड़ी चीज़ को बारीकी से देखने की क्षमता।
धैर्य
जल्दबाज़ी में निष्कर्ष निकालना फॉरेंसिक में नुकसान पहुंचा सकता है।
समस्या सुलझाने की क्षमता
हर केस एक अलग चुनौती होता है।
फॉरेंसिक साइंस में कौन-कौन सी नौकरियां मिलती हैं?
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फॉरेंसिक साइंटिस्ट
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क्राइम सीन इनवेस्टिगेटर
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फॉरेंसिक टॉक्सीकोलॉजिस्ट
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डॉक्यूमेंट व हैंडराइटिंग एक्सपर्ट
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साइबर फॉरेंसिक एक्सपर्ट
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DNA एनालिस्ट
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फॉरेंसिक बैलिस्टिक एक्सपर्ट
सरकारी नौकरियों की बड़ी परीक्षाएं
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SSC CGL – केंद्रीय विभागों में तकनीकी पद
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State PSC – राज्य फॉरेंसिक लैब में भर्ती
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UPSC – CBI/IB में वैज्ञानिक अधिकारी
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DRDO/ISRO – रिसर्च आधारित फॉरेंसिक भूमिका
नौकरी के और भी बड़े अवसर
एमिटी यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर डॉ. विश्वप्रकाश नाइक के अनुसार:
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हर साल 1200–1300 विद्यार्थी IB में भर्ती होते हैं
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2025 में IB ने 4000+ एसीआईओ पद निकाले थे
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IT कंपनियों में एनालिस्ट की खूब मांग है
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फूड, वाटर और एयर क्वालिटी लैब में भी फॉरेंसिक एक्सपर्ट की जरूरत
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बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टर में डॉक्यूमेंट विश्लेषण
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प्राइवेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसियां
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लॉ फ़र्म — वैज्ञानिक रिपोर्टों को समझने में वकीलों को मदद
उच्च पढ़ाई के बाद और क्या विकल्प?
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पीएचडी के बाद शिक्षण और रिसर्च के बड़े अवसर
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निजी डिटेक्टिव एजेंसियों से जुड़ने का मौका
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साइबर सिक्योरिटी सेक्टर में हाई पैकेज वाली नौकरियां
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सरकारी विभागों में वैज्ञानिक सलाहकार की भूमिका
क्राइम और टेक्नोलॉजी के बढ़ते दौर में फॉरेंसिक साइंस न सिर्फ दिलचस्प बल्कि स्थायी, हाई-डिमांड और सम्मानजनक करियर विकल्प बन चुका है। अगर आपके भीतर ऑब्ज़रवेशन, धैर्य और समस्या सुलझाने का हुनर है—तो यह क्षेत्र आपके लिए सुनहरा भविष्य साबित हो सकता है।
