अघोरी साध्वी को ताजमहल में नहीं मिली एंट्री
आगरा। सोशल मीडिया पर “भारत की सबसे सुंदर अघोरी साध्वी” कही जाने वाली अघोरी चंचलनाथ जी गुरुवार को ताजमहल देखने आगरा पहुंचीं। लेकिन सुरक्षा जांच के दौरान उन्हें सीआईएसएफ कर्मियों ने गेट पर ही रोक दिया। उनके हाथ में त्रिशूल, डमरू और एक पात्र (खप्पर) था। सुरक्षा एजेंसियों को इन वस्तुओं पर आपत्ति थी।चंचलनाथ ने त्रिशूल और डमरू बाहर छोड़ने पर सहमति जताई, लेकिन जब सुरक्षा कर्मियों ने खप्पर अंदर ले जाने की अनुमति नहीं दी, तो उन्होंने ताजमहल देखे बिना लौट जाना ही उचित समझा।
खप्पर छोड़ने से क्यों किया इनकार
अघोरी साधना में खप्पर का बेहद पवित्र और प्रतीकात्मक महत्व होता है। अघोरी इसी पात्र में भोजन करते हैं और साधना के दौरान यही उनका आध्यात्मिक उपकरण होता है। चंचलनाथ जी ने बताया कि यह उनके लिए ‘आत्मिक अस्तित्व का हिस्सा’ है, इसलिए इसे छोड़ना संभव नहीं था। सुरक्षा नियमों के तहत किसी भी प्रकार के पात्र या धार्मिक उपकरण को ताजमहल परिसर में ले जाने की अनुमति नहीं होती। इसी कारण उन्हें गेट से ही वापस लौटना पड़ा।
कौन हैं अघोरी साध्वी चंचलनाथ जी
चंचलनाथ जी का जीवन रहस्यों और आध्यात्मिक अनुभवों से भरा है। बताया जाता है कि उनका जन्म पश्चिम बंगाल में एक आध्यात्मिक परिवार में हुआ था। बचपन में ही, सात वर्ष की आयु में, उनके माता-पिता ने उन्हें उनके गुरु के सुपुर्द कर दिया, जिसके बाद उन्होंने साधना आरंभ की। किशोरावस्था के बाद उन्होंने भारतभर में भ्रमण किया। उनके गुरु का निधन इसी साल मार्च 2025 में हुआ। इसके बाद वे हरियाणा के करनाल जिले के रायपुरा गांव में बस गईं, जहाँ उनका भव्य आश्रम है और माँ काली की विशाल प्रतिमा स्थापित है।
‘आधुनिक अघोरी’ की छवि
चंचलनाथ जी पारंपरिक अघोरी होने के बावजूद सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय हैं। उनका Instagram अकाउंट (जिसे शायद उनके अनुयायी संचालित करते हैं) हजारों फॉलोअर्स के साथ बेहद लोकप्रिय है। वहाँ उनकी तस्वीरें और वीडियो दिखाते हैं कि साधना के साथ-साथ उनकी लाइफस्टाइल आधुनिक और आत्मविश्वासी है। कई लोग उन्हें “मॉडर्न अघोरी साध्वी” कहकर संबोधित करते हैं।
‘चमत्कारी शक्तियों’ की चर्चा
स्थानीय लोगों और अनुयायियों के बीच चंचलनाथ जी की चमत्कारी शक्तियों की भी खूब चर्चा होती है। कहा जाता है कि वे खाली हाथों से हवन में अग्नि प्रज्वलित कर देती हैं, और कुछ वीडियो में वे नींबू को हवा में तैराते हुए भी दिखती हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि उनके आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।
उनका करनाल वाला आश्रम अब भक्ति, रहस्य और सोशल मीडिया प्रभाव का नया संगम बन चुका है।
