GST विभाग की लापरवाही से सरकार को लगा 1000 करोड़ का चूना?

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लखनऊ। वर्ष 2000 से 2007 में निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए देशभर में विशेषकर गुजरात में EOU (Export oriented unit) स्थापित की गईं।

इन यूनिटों का उदृेश्य था कि वह विदेशों से कच्चा माल आयात कर उसे पुनः विदेशों में निर्यात करेंगी। लेकिन कंपनियों ने ऐसा नहीं किया। अधिकांश इकाईयों ने कस्टम ड्यूटी का लाभ उठाकर इस कच्चे माल को घरेलू बाजार में मोटा मुनाफा कमाकर बेच दिया।

2002 में इन ईकाइयों के खिलाफ CBI एवं सेंट्रल एक्साईज एवं कस्टम विभाग ने कार्रवाई की कारण बताओ नोटिस जारी किये। कस्टम ड्यूटी की वसूली के लिए इन इकाईयों के खिलाफ आदेश भी पारित किया। लेकिन यह सब कार्रवाई मात्र कागजों पर ही है। लगभग एक दशक बीत जाने के बाद भी विभाग इन इकाईयों के मालिकों का पता नहीं लगा पाया है।

एक आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार सूरत प्रभाग के अंतर्गत 84 ईकाइयों पर 438 करोड़ का बकाया है जिसे विभाग अभी तक वसूल नहीं कर पाया है।

भाटापारा पॉलीटेक्स इकाई छत्तीसगढ़ के भाटापारा में 2002 में शुरू हुई। 2003 में विभाग की जानकारी में आया कि इकाई फ्रॉड है।
इस दौरान विभाग के निवारक शाखा DGCEI एवं CBI ने भी जांच शुरू की लेकिन विभाग की जानकारी के बावजूद भी यह फ्रॉड 2003 से 2007 तक चलता रहा। विभाग इस इकाई से अभी तक करोड़ों का राजस्व वसूल नहीं करा पाया है। नाही यह रकम विभाग के बकायदारों (एरियर) की सूची में हैं।

पुष्पा सिल्क मिल्स के नाम से राजस्थान में इकाई खोली गयी जिस पर आठ करोड़ बकाया है जिसे विभाग अभी तक वसूल नहीं कर पाया है।

नागपुर में ईवा टेक्ट प्रा0 लि0 के नाम से बुटी बोरी में इकाई चालू की गई। इस इकाई ने भी इसी तरह का घोटाला किया। विभाग द्वारा कंपनी के विरूध आदेश पारित किया गया। लेकिन अभी तक विभाग एक रूपया भी वसूल नहीं कर पाया है। और न ही इकाई की संपत्ति एवं मालिक को खोज पाया है। मजेदार बात यह है कि इस इकाई में लापरवाही बरतने लिये विभाग के तीन कर्मचारियों को दण्डित किया गया है।

कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधि संजय थूल का कहना है कि विभाग में अधिकारी, कर्मचारियों पर तो गाज गिरा रहे हैं, लेकिन जब बात कंपनियों पर कार्रवाई करने की आती है, तो वे एक नोटिस जारी कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। देशभर में ऐसे सैकड़ों मामले हैं, जिसमें वर्षों से सरकारी राजस्व अटका पड़ा है। लेकिन किसी को इसकी परवाह नहीं है। अगर विभाग उन्हें नहीं खोज पा रहा है तो मामले को पुलिस या CBI के हवाले भी किया जा सकता है।

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