‘गुड महाराजा’ ने द्वितीय विश्वयुद्ध में पोलिश बच्चों को दिया था आश्रय
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और पोलैंड के ऐतिहासिक संबंधों का जिक्र करते हुए नवानगर के महाराजा जाम साहेब दिग्विजयसिंहजी जडेजा की मानवीय विरासत को याद किया। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान मोदी ने बताया कि द्वितीय विश्वयुद्ध के समय पोलिश बच्चों को आश्रय देने के कारण महाराजा को आज भी पोलैंड में ‘गुड महाराजा’ के नाम से सम्मानपूर्वक याद किया जाता है।
मानवता और करुणा पर आधारित है भारत-पोलैंड की दोस्ती
हैदराबाद हाउस में हुई बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और पोलैंड की मित्रता केवल राजनयिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवता और करुणा की साझा विरासत पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत बनाने में उन भारतीय शासकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने युद्ध के दौरान विस्थापित पोलिश परिवारों और बच्चों को भारत में आश्रय दिया था।
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने भी ‘गुड महाराजा’ को याद करते हुए कहा कि पोलिश लोगों की राष्ट्रीय स्मृति में उनका विशेष स्थान है। उनके अनुसार, महाराजा की पहचान केवल एक प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों को दी गई वास्तविक सहायता के कारण बनी है।
कौन थे ‘गुड महाराजा’ जाम साहेब?
महाराजा जाम साहेब का पूरा नाम सर दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी जडेजा था। वह तत्कालीन नवानगर रियासत के शासक थे, जिसका केंद्र वर्तमान गुजरात के जामनगर क्षेत्र में था।
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान पोलैंड पर जर्मनी और सोवियत संघ के आक्रमण के बाद बड़ी संख्या में पोलिश नागरिक विस्थापित हो गए थे। वर्ष 1942 में महाराजा ने बालाचड़ी, जामनगर के पास, पोलिश बच्चों को आश्रय दिया। वहां उन्हें रहने, भोजन, शिक्षा और चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
महाराजा के इस मानवीय कदम के कारण पोलैंड में उन्हें ‘डोब्री महाराजा’ यानी ‘गुड महाराजा’ कहा जाने लगा। वारसा में उनके सम्मान में ‘गुड महाराजा स्क्वायर’ भी है।
कोल्हापुर के शाही परिवार ने भी की थी मदद
पोलिश नागरिकों को आश्रय देने में केवल नवानगर ही नहीं, बल्कि तत्कालीन कोल्हापुर रियासत के शाही परिवार ने भी योगदान दिया था। महाराष्ट्र के कोल्हापुर के पास वलीवडे में 1942 से 1948 के बीच करीब 5,000 पोलिश शरणार्थियों को आश्रय मिला था।
वलीवडे में स्कूल, चर्च और सामुदायिक सुविधाएं विकसित हुईं। इस बस्ती ने विस्थापित परिवारों को युद्ध के कठिन दौर में सुरक्षित वातावरण और अपनी संस्कृति से जुड़े रहने का अवसर दिया।
2022 में भारतीय छात्रों की मदद को भी किया याद
प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन में युद्ध के दौरान भारतीय छात्रों की सुरक्षित वापसी में पोलैंड की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पोलैंड ने जरूरतमंद लोगों की मदद की उसी मानवीय भावना को आगे बढ़ाया।
मोदी ने जाम साहेब स्मारक युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का भी जिक्र किया। इस कार्यक्रम के तहत पोलैंड के युवा भारत आकर यहां के इतिहास, संस्कृति और विकास को समझते हैं। इसकी घोषणा प्रधानमंत्री ने अगस्त 2024 में अपनी पोलैंड यात्रा के दौरान की थी।
भारत-पोलैंड संबंधों को नई दिशा
भारत और पोलैंड ने वर्ष 2024 में अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया था। दोनों देश रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, ऊर्जा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं।
22 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड टस्क की बैठक में दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य भी रखा। इस तरह ऐतिहासिक मित्रता के साथ-साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
