ग्राहम स्टेंस हत्याकांड: वो खौफनाक मामला जिसने 1 साल में बदलवा दिए 3 मुख्यमंत्री
नई दिल्ली। भारत के राजनीतिक और आपराधिक इतिहास में कुछ घटनाएं ऐसी हैं, जिन्होंने न सिर्फ देश को झकझोर कर रख दिया, बल्कि पूरी की पूरी सत्ता पलट दी। ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला ओडिशा का ‘ग्राहम स्टेंस हत्याकांड’ है। राजनीतिक इतिहास के पन्नों में दर्ज इस घटना को आज करीब 27 साल हो चुके हैं, लेकिन इसके राजनीतिक परिणाम इतने भयानक थे कि ओडिशा में तत्कालीन सत्ताधारी कांग्रेस को एक ही साल में अपने तीन मुख्यमंत्री बदलने पड़े और उसके बाद पार्टी राज्य से ऐसी साफ हुई कि आज तक सत्ता में वापसी नहीं कर पाई।
क्या था ग्राहम स्टेंस हत्याकांड?
22 जनवरी 1999 की सर्द रात को ओडिशा के क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में एक खौफनाक वारदात हुई। ऑस्ट्रेलिया से आए ईसाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो मासूम बेटे (फिलिप और टिमोथी) अपनी स्टेशन वैगन गाड़ी में सो रहे थे। तभी दारा सिंह के नेतृत्व में एक उग्र भीड़ ने उन्हें गाड़ी समेत जिंदा जला दिया। ग्राहम स्टेंस पिछले कई सालों से वहां कुष्ठ रोगियों की सेवा कर रहे थे। हालांकि, हमलावरों का आरोप था कि वे सेवा की आड़ में आदिवासियों का जबरन धर्मांतरण करा रहे थे।
राजनीतिक भूचाल: जब गई जेबी पटनायक की कुर्सी
इस नृशंस हत्याकांड की गूंज सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में सुनाई दी। उस समय ओडिशा में कांग्रेस की सरकार थी और जानकी वल्लभ (जेबी) पटनायक मुख्यमंत्री थे। घटना के बाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरकार पर भारी दबाव बना। विपक्ष ने कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार को चारों तरफ से घेर लिया। आखिरकार, तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश पर जेबी पटनायक को फरवरी 1999 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
एक साल के भीतर बदले गए तीन मुख्यमंत्री
जेबी पटनायक के इस्तीफे के बाद कांग्रेस में अफरा-तफरी मच गई और डैमेज कंट्रोल के लिए एक के बाद एक कई फैसले लिए गए:
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गिरिधर गमांग (फरवरी 1999): पटनायक के बाद आदिवासी नेता गिरिधर गमांग को ओडिशा का नया मुख्यमंत्री बनाया गया।
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महाचक्रवात की मार: गमांग का कार्यकाल भी विवादों और आपदाओं से घिरा रहा। अक्टूबर 1999 में ओडिशा में एक विनाशकारी सुपर साइक्लोन आया, जिसमें करीब 10 हजार लोगों की जान चली गई। राहत और बचाव कार्य में नाकामी के कारण गमांग सरकार की भारी किरकिरी हुई।
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हेमानंद बिस्वाल (दिसंबर 1999): बढ़ते असंतोष को देखते हुए दिसंबर 1999 में गिरिधर गमांग को भी हटा दिया गया और उनकी जगह हेमानंद बिस्वाल को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी गई।
इस तरह, सिर्फ 1999 के एक ही साल के भीतर ओडिशा ने तीन मुख्यमंत्री (जेबी पटनायक, गिरिधर गमांग और हेमानंद बिस्वाल) देखे।
ओडिशा से कांग्रेस का सफाया और नवीन पटनायक का उदय
लगातार बदलते मुख्यमंत्री, ग्राहम स्टेंस हत्याकांड का गहरा दाग और महाचक्रवात से निपटने में विफलता का सीधा खामियाजा कांग्रेस को साल 2000 के विधानसभा चुनावों में भुगतना पड़ा। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से हार गई।
दूसरी तरफ, बीजू जनता दल (BJD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन ने बंपर जीत हासिल की और नवीन पटनायक राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। ग्राहम स्टेंस मामले के बाद जो कांग्रेस साल 2000 में सत्ता से बाहर हुई, वह आज तक (2026 तक) ओडिशा में दोबारा सरकार नहीं बना पाई है।
दोषियों को सजा और पत्नी की क्षमा
इस मामले में मुख्य आरोपी दारा सिंह को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया और सुप्रीम कोर्ट तक चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई। वहीं, ग्राहम स्टेंस की पत्नी ग्लेडिस स्टेंस ने यह कहकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था कि उन्होंने अपने पति और बच्चों के हत्यारों को माफ कर दिया है। ग्लेडिस को कुष्ठ रोगियों की सेवा के लिए 2005 में भारत सरकार द्वारा ‘पद्मश्री’ से भी सम्मानित किया गया था।
