सरकार का दो टूक: पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट को नागरिकता का पक्का या अंतिम सबूत नहीं माना जा सकता। विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार को साफ किया कि पासपोर्ट मुख्य रूप से विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला एक अंतरराष्ट्रीय पहचान पत्र है, जो राष्ट्रीयता दर्शाता है, लेकिन यह नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है।
मुख्य बिंदु:
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विदेश मंत्रालय के अनुसार देश के 8% से भी कम नागरिकों के पास ही पासपोर्ट है।
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विशेष परिस्थितियों में गैर-भारतीयों को भी जनहित में पासपोर्ट जारी किया जा सकता है।
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विपक्ष ने दागे सवाल- अगर पासपोर्ट नहीं, तो नागरिकता का असली सबूत क्या है?
क्या कहा विदेश मंत्रालय ने?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और पासपोर्ट नियम, 1980 के तहत सरकार देश से बाहर यात्रा के लिए यह दस्तावेज जारी करती है। पूरी जांच और वेरिफिकेशन के बाद ही इसे सौंपा जाता है। हालांकि, मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जनहित में जरूरत पड़ने पर सरकार किसी गैर-भारतीय नागरिक को भी पासपोर्ट जारी कर सकती है। यही कारण है कि इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता।
मंत्रालय ने इस संदर्भ में 2013 के बॉम्बे हाईकोर्ट के एक अहम फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें अदालत ने पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण मानने से स्पष्ट इनकार कर दिया था।
विपक्ष का सरकार पर तीखा हमला
सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद देश में सियासत गरमा गई है। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर सीधे सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कड़े शब्दों में पूछा कि, “यदि पासपोर्ट भी नागरिकता का दस्तावेज नहीं है, तो आखिर कौन सा सरकारी दस्तावेज नागरिकता का असली सबूत है?”
विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार इस तरह के बयानों के जरिए उन लोगों की नागरिकता पर सवाल उठाने की पृष्ठभूमि तैयार कर रही है, जिनसे उसकी राजनीतिक असहमति है।
आधार कार्ड भी केवल पहचान पत्र: सुप्रीम कोर्ट
गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी एक मामले की सुनवाई (मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के दौरान स्पष्ट किया था कि आधार कार्ड का इस्तेमाल केवल पहचान (Identity) साबित करने के लिए किया जा सकता है। इसे भी नागरिकता (Citizenship) के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्रीयता और नागरिकता में क्या है अंतर?
कानूनी जानकारों के अनुसार, ‘राष्ट्रीयता’ यह बताती है कि कोई व्यक्ति मूल रूप से किस देश से संबंध रखता है (जैसे पासपोर्ट पर दर्ज होता है)। वहीं, ‘नागरिकता’ उस देश में व्यक्ति को मिलने वाले कानूनी अधिकारों और जिम्मेदारियों को तय करती है। भारत में नागरिकता मुख्य रूप से ‘नागरिकता कानून, 1955’ (Citizenship Act, 1955) के प्रावधानों के तहत ही तय की जाती है।
