मिडल ईस्ट महाजंग के 7 दिन: ईरान में तबाही का मंजर

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दुबई/यरुशलम मिडल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष को आज शुक्रवार (6 मार्च 2026) को एक हफ्ता पूरा हो गया है। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्युरी’ और ‘ऑपरेशन लायंस रोर’ ने पूरे ईरान को दहला कर रख दिया है। पिछले सात दिनों में हुए हमलों और जवाबी कार्यवाहियों ने इस क्षेत्र को एक ऐसे विनाशकारी मोड़ पर ला खड़ा किया है, जिसकी कल्पना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नहीं की गई थी।

युद्ध का घटनाक्रम: 7 दिनों की बड़ी बातें

संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई, जब इजरायल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर ‘प्री-एम्प्टिव’ स्ट्राइक की।

  • नेतृत्व को झटका: अपुष्ट खबरों के अनुसार, शुरुआती हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने की सूचना है, जिससे ईरानी सत्ता में भारी अस्थिरता पैदा हो गई है।

  • नौसैनिक तबाही: फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना ने ईरान के अत्याधुनिक युद्धपोत IRIS बुशहर और एक ड्रोन कैरियर को समुद्र में डुबो दिया है।

  • क्षेत्रीय फैलाव: लेबनान से हिज्बुल्लाह के हमलों के जवाब में इजरायल ने बेरूत में भारी बमबारी की है, जिससे लेबनान में भी मानवीय संकट गहरा गया है।

हजारों की मौत और बढ़ता मानवीय संकट

स्वतंत्र सूत्रों के अनुसार, पिछले एक हफ्ते में ईरान के भीतर मरने वालों की संख्या 1200 के पार पहुंच गई है। खाड़ी देशों—यूएई, बहरीन और कुवैत—में भी ईरानी मिसाइल हमलों के कारण भारी नुकसान हुआ है। बहरीन में कई आवासीय परिसर और होटल मलबे के ढेर में तब्दील हो चुके हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर

युद्ध की आग ने वैश्विक बाजारों को झुलसा दिया है:

  1. तेल की कीमतें: होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे ब्रेंट क्रूड $90 प्रति बैरल के पार चला गया है।

  2. बाजारों में कोहराम: भारत सहित दुनिया भर के शेयर बाजार धड़ाम हो गए हैं। भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है।

ट्रंप का कड़ा रुख और इजरायल की अगली रणनीति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि तेहरान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने ईरान से ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’ की मांग की है। वहीं, इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने ‘अगले चरण’ की शुरुआत करते हुए तेहरान के भीतर मिसाइल निर्माण इकाइयों और शासन से जुड़े महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति की कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि ईरान अपने बचे हुए ‘साइलेंट वेपन्स’ का इस्तेमाल करता है, तो यह युद्ध तीसरे विश्व युद्ध की आहट भी बन सकता है।

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