फिल्म समीक्षा: ‘मर्दानी 3’ में रानी मुखर्जी का फिर दिखा रौद्र रूप
नई दिल्ली। बॉलीवुड की सबसे सफल महिला केंद्रित फ्रेंचाइजी में से एक ‘मर्दानी’ का तीसरा हिस्सा आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गया है। रानी मुखर्जी एक बार फिर अपनी सिग्नेचर भूमिका, निर्भीक पुलिस अधिकारी शिवानी शिवाजी रॉय के रूप में वापस लौटी हैं। इस बार फिल्म की कहानी समाज के एक ऐसे अंधेरे कोने को उजागर करती है, जिससे अक्सर हम नजरें चुरा लेते हैं— भिखारी-माफिया और मानव तस्करी।
दमदार शुरुआत और रोंगटे खड़े करने वाला विलेन
फिल्म का निर्देशन अभिराज मीनावाला ने किया है। कहानी एक हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग केस से शुरू होती है, जो धीरे-धीरे एक अंतरराष्ट्रीय रैकेट की परतें खोलती है। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी विलेन ‘अम्मा’ (मल्लिका प्रसाद) है। अम्मा का किरदार इतना निर्मम और सनकी दिखाया गया है कि उसकी एंट्री ही दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देती है। फिल्म का पहला भाग काफी कसा हुआ है और दर्शकों को अपनी सीट से बांधे रखता है।
सिस्टम और संघर्ष की कहानी
रानी मुखर्जी ने एक बार फिर साबित किया है कि क्यों उन्हें इस पीढ़ी की बेहतरीन अभिनेत्रियों में गिना जाता है। इस बार शिवानी को न केवल अपराधियों से लड़ना है, बल्कि सरकारी मशीनरी और सिस्टम के उन दोहरे मापदंडों को भी चुनौती देनी है, जो रईसों और गरीबों के लिए अलग-अलग तरीके से काम करते हैं।
सेकंड हाफ में कहानी का ‘फिल्मी’ रुख
समीक्षकों के अनुसार, फिल्म का दूसरा हिस्सा थोड़ा ‘लार्जर दैन लाइफ’ हो जाता है। जहाँ पिछली दो फिल्मों में शिवानी सिस्टम के भीतर रहकर काम करती थी, वहीं इस बार वह एक ‘बागी’ और ‘विजिलांटे’ अवतार में नजर आती है। ड्रग ट्रायल्स और इंटरनेशनल मिशन जैसे एंगल फिल्म की गंभीरता को थोड़ा कम करते हैं, लेकिन रानी मुखर्जी का ‘हीरोइज्म’ फिल्म को संभाल लेता है।
3/5 स्टार ‘मर्दानी 3’ एक साहसी फिल्म है जो एक जरूरी मुद्दे पर बात करती है। यदि आप रानी मुखर्जी के जबरदस्त अभिनय और कॉप-ड्रामा फिल्मों के शौकीन हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक मस्ट-वॉच (Must Watch) है।
