ग्रीनलैंड पर कब्जे की ट्रंप की मांग से बढ़ा तनाव: नाटो सैनिकों की तैनाती शुरू

0
greenland

नई दिल्ली: अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं के बीच व्हाइट हाउस में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद ग्रीनलैंड में सैन्य घेराबंदी बढ़ने की संभावना है। ग्रीनलैंड के उप प्रधानमंत्री म्यूट एगेडे ने बुधवार को घोषणा की कि नाटो के और अधिक सैनिक ग्रीनलैंड की ओर भेजे जा रहे हैं। उन्होंने आने वाले दिनों में सैन्य उड़ानों और जहाजों की संख्या में भी भारी वृद्धि होने की उम्मीद जताई है।

यूरोपीय देशों की जवाबी सैन्य तैयारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाने की मांग के बाद यूरोपीय देशों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। जर्मनी, स्वीडन और नार्वे ने इस खनिज संपदा से संपन्न द्वीप पर टोही दल भेजने का फैसला किया है। जर्मन मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जर्मनी इस सप्ताह अपने पहले सैनिक ग्रीनलैंड भेजेगा, जिनकी तैनाती गुरुवार तक संभावित है। फ्रांस, जर्मनी और नॉर्डिक देशों ने पहले ही एक साझा यूरोपीय सैन्य अभियान में भाग लेने की सहमति दे दी है।

डेनमार्क का सख्त रुख: ‘खत्म हो जाएगा नाटो’

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट्टे फ्रेडरिकसन ने अमेरिकी इरादों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कब्जे का प्रयास किया, तो इसका सीधा परिणाम नाटो (NATO) सैन्य गठबंधन का अंत होगा। उन्होंने जोर देकर कहा: “यह खनिज संपन्न द्वीप यहां के लोगों का है और ग्रीनलैंड से संबंधित मामलों में निर्णय लेने का अधिकार केवल यहां की जनता के पास है।”

मैक्रों ने दी गंभीर परिणामों की चेतावनी

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। रायटर के अनुसार, मैक्रों ने कैबिनेट बैठक में कहा कि यदि किसी यूरोपीय सहयोगी देश की संप्रभुता पर आंच आती है, तो इसके परिणाम ‘अभूतपूर्व’ होंगे।

मुख्य बिंदु:

  • सैन्य बढ़त: ग्रीनलैंड में नाटो सैनिकों, उड़ानों और जहाजों की संख्या बढ़ेगी।

  • जर्मनी की पहल: इस सप्ताह गुरुवार तक जर्मनी अपनी पहली सैन्य टुकड़ी भेजेगा।

  • टोही दल: स्वीडन और नार्वे भी ट्रंप की मांग के विरोध में अपने टोही दल तैनात करेंगे।

  • संप्रभुता का सवाल: डेनमार्क और फ्रांस ने ग्रीनलैंड की संप्रभुता के उल्लंघन पर नाटो के अस्तित्व को खतरा बताया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *