GSRTC में महिला कंडक्टरों का छलका दर्द, 16 घंटे की ड्यूटी और भेदभाव के आरोप
गांधीनगर। गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम (GSRTC) में महिला कंडक्टरों के साथ कथित भेदभाव और उत्पीड़न का मामला सामने आया है। महिला कर्मचारियों ने विभागीय अधिकारियों पर मनमाने तरीके से ड्यूटी लगाने, दो शिफ्टों में काम कराने, ट्रांसफर की धमकी देने और ड्यूटी आवंटन में पक्षपात करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, विभागीय अधिकारियों ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि ड्यूटी निर्धारित व्यवस्था के तहत लगाई जाती है और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किया जाता है।
महिला कंडक्टरों का आरोप है कि विभाग में सभी कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि कुछ महिला कर्मचारियों को एक शिफ्ट में ड्यूटी दी जाती है, जबकि कुछ को दिन में दो शिफ्टों में काम करना पड़ता है। इसके कारण उन्हें करीब 16 घंटे तक काम करना पड़ता है। कर्मचारियों ने ड्यूटी आवंटन में जातिगत भेदभाव और यूनियन से जुड़े मतभेदों के आधार पर पक्षपात किए जाने की आशंका भी जताई है।
आवाज उठाने पर ट्रांसफर की धमकी देने का आरोप
महिला कंडक्टरों का कहना है कि अपनी समस्याएं उठाने पर उन्हें ट्रांसफर किए जाने की धमकी दी जाती है। आरोप है कि अधिकारियों की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाने वाले कर्मचारियों को अलग-अलग तरीकों से परेशान किया जाता है। कुछ कर्मचारियों ने ड्यूटी आवंटन के लिए पैसे मांगे जाने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कर्मचारियों का यह भी कहना है कि कभी ड्यूटी से हटाने तो कभी स्पष्टीकरण मांगने के नाम पर उन पर दबाव बनाया जाता है। उनका आरोप है कि पसंदीदा कर्मचारियों को मनचाही जगह पर ड्यूटी दी जाती है, जबकि अन्य कर्मचारियों को कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है।
‘बच्चे को सोते हुए ही देख पाती हूं’
एक महिला कंडक्टर ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उनका छोटा बच्चा है, लेकिन लंबे ड्यूटी घंटों के कारण वह उसे पर्याप्त समय नहीं दे पाती हैं।
महिला के अनुसार, वह कई दिनों से सुबह पांच बजे ड्यूटी के लिए घर से निकल जाती हैं और रात करीब दस बजे वापस पहुंचती हैं। उन्होंने भावुक होकर बताया कि कई बार उन्हें अपने बच्चे को केवल सोते हुए देखने का मौका मिलता है। हर दिन वह बच्चे से कहती हैं कि आज जल्दी घर लौट आएंगी, लेकिन काम की वजह से ऐसा संभव नहीं हो पाता।
महिला कंडक्टरों का कहना है कि लगातार लंबी ड्यूटी करने से उनके पारिवारिक जीवन पर भी असर पड़ रहा है। उनका सवाल है कि यदि किसी कर्मचारी को नियमित रूप से दो शिफ्टों में काम करना पड़ रहा है, तो उसकी समस्या का स्थायी समाधान कब निकलेगा?
10 मिनट की देरी पर कार्रवाई की धमकी
एक अन्य महिला कंडक्टर ने आरोप लगाया कि ड्यूटी पर पहुंचने में दस मिनट की देरी होने पर भी वेतन काटने की धमकी दी जाती है। उनके अनुसार, छोटी-छोटी बातों पर मेमो जारी किए जाते हैं और बार-बार स्पष्टीकरण मांगा जाता है।
महिला कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी जिम्मेदारियां निभाना चाहती हैं, लेकिन ड्यूटी के समय और आवंटन में कथित असमानता के कारण उन्हें मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर कुछ महिला कंडक्टरों ने बताया कि वे भी इस व्यवस्था से परेशान हैं। हालांकि, ट्रांसफर का डर होने के कारण वे खुलकर शिकायत करने से बचती हैं। उनका आरोप है कि अधिकारियों द्वारा घर से दूर स्थान पर भेजने की धमकी दिए जाने की आशंका उन्हें अपनी समस्याएं उठाने से रोकती है।
सुपरवाइजर ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
महिला कंडक्टरों द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में जब सुपरवाइजर से बात की गई, तो उन्होंने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया। उनका कहना था कि किसी भी महिला कंडक्टर को मनमाने तरीके से कम या ज्यादा काम नहीं दिया जाता।
सुपरवाइजर के अनुसार, जिन कर्मचारियों को एक दिन में दो शिफ्टों में ड्यूटी दी जाती है, उन्हें अतिरिक्त भुगतान भी किया जाता है। उन्होंने बताया कि ड्राइवरों और कंडक्टरों को निर्धारित समय पर चेक-इन और चेक-आउट करने के लिए भी भुगतान किया जाता है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक कर्मचारी को निर्धारित ड्यूटी समय से 25 मिनट पहले पहुंचना चाहिए, ताकि चेक-इन की प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके। उनके मुताबिक, इस व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को अलग से भुगतान किया जाता है।
डिपो मैनेजर बोले- सभी आरोप निराधार
इस मामले में गांधीनगर डिपो मैनेजर ने भी महिला कंडक्टरों के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि डिपो में ड्राइवरों और महिला कंडक्टरों की ड्यूटी लगाने के लिए अलग-अलग सुपरवाइजर नियुक्त हैं। इन दोनों की कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए एक अन्य सुपरवाइजर भी है, जो सीधे उन्हें रिपोर्ट करती है।
डिपो मैनेजर के अनुसार, ड्राइवर और कंडक्टर किसी भी समस्या के समाधान के लिए उनसे मिल सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि कर्मचारियों की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान किया जाता है।
डिपो में 39 कंडक्टरों के पद खाली
डिपो मैनेजर ने कर्मचारियों की संख्या के संबंध में बताया कि गांधीनगर डिपो में कंडक्टरों के कुल 256 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 217 पद भरे हुए हैं, जबकि 39 पद खाली हैं। वर्तमान में कार्यरत 217 कंडक्टरों में 62 महिलाएं और 155 पुरुष शामिल हैं।
डिपो मैनेजर ने बताया कि 14 सितंबर 2026 के बाद विभाग की ओर से करीब 2,000 किलोमीटर अतिरिक्त परिचालन कार्य बढ़ाया गया है। इसके कारण कर्मचारियों के काम के घंटे बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान निकालने के प्रयास किया जा रहा है।
जांच और जवाबदेही पर उठे सवाल
महिला कंडक्टरों के आरोपों और अधिकारियों के जवाब के बीच अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या ड्यूटी आवंटन की व्यवस्था की निष्पक्ष समीक्षा की जाएगी? क्या दो शिफ्टों में काम करने वाले कर्मचारियों के वास्तविक ड्यूटी घंटों, अतिरिक्त भुगतान और कार्यभार का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाएगा?
यदि ड्यूटी आवंटन में भेदभाव, अनुचित दबाव या नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। वहीं, यदि विभाग का कहना है कि सभी व्यवस्थाएं नियमों के अनुसार चल रही हैं, तो पारदर्शी रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
अब देखना यह है कि GSRTC प्रशासन महिला कर्मचारियों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराता है या नहीं और लंबे ड्यूटी घंटों की समस्या के समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
