Sanchar Nest पर बड़ा एक्शन: 15 साल के खातों का होगा स्पेशल ऑडिट
गाजियाबाद। वेव सिटी स्थित Sanchar Nest Sahakari Awas Samiti में फ्लैटों की रजिस्ट्री, अतिरिक्त शुल्क और सदस्यों की शिकायतों से शुरू हुआ विवाद अब बड़े वित्तीय और प्रशासनिक जांच के रूप में सामने आया है। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के दस्तावेजों में समिति के कामकाज को लेकर गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। विभाग ने समिति के पिछले 15 वर्षों के आय-व्यय और बैंक खातों का विशेष लेखा परीक्षण (Special Audit) कराने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
जांच दस्तावेजों में समिति के फ्लैटों के निर्माण, आवंटन, रजिस्ट्री, अतिरिक्त शुल्क की वसूली और धनराशि के इस्तेमाल को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। अधिकारियों के स्तर पर मामले में ₹100 करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताए जाने की बात सामने आई है, हालांकि अंतिम राशि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
506 फ्लैटों का मामला, सदस्यों से करोड़ों की वसूली का उल्लेख
विभागीय जांच में समिति के फ्लैटों और सदस्यों से प्राप्त धनराशि को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। दस्तावेज में आवंटित फ्लैटों के संबंध में बड़ी धनराशि वसूल किए जाने और अतिरिक्त रकम लिए जाने का उल्लेख है।
जांच में यह भी सवाल उठाया गया कि सदस्यों को आवंटित फ्लैटों के बदले प्राप्त धनराशि का इस्तेमाल किस तरह किया गया और क्या सभी लेन-देन समिति के नियमों के अनुरूप थे।
रजिस्ट्री नहीं, बढ़ता रहा Escalation Charge
सदस्यों की शिकायतों में लंबे समय से फ्लैटों की रजिस्ट्री नहीं होने और अनधिकृत रूप से वृद्धि शुल्क/Escalation Charge लगाए जाने का मुद्दा प्रमुख रहा है।
दस्तावेज में Construction Linked Plan के बावजूद सदस्यों से भुगतान लिए जाने और बाद में अतिरिक्त रकम की मांग को लेकर भी शिकायतों का उल्लेख है। कुछ सदस्यों का आरोप है कि भुगतान करने के बावजूद उन्हें रजिस्ट्री के लिए लगातार परेशान होना पड़ा।
फ्लैटों को Open Market में बेचने के आरोप
जांच में समिति के कुछ फ्लैटों को कथित तौर पर Open Market में बेचने और मूल सदस्यों के अधिकारों को प्रभावित करने के आरोप भी सामने आए हैं।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कुछ वास्तविक सदस्यों के फ्लैटों का आवंटन रद्द किया गया और बाद में उन्हीं फ्लैटों को दूसरे लोगों को बेचे जाने के मामले सामने आए। कई मामलों में मूल सदस्यों की जमा रकम की वापसी को लेकर भी विवाद है।
स्टांप ड्यूटी की रकम के इस्तेमाल पर सवाल
विभागीय जांच में एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी सामने आया कि सदस्यों की फ्लैट रजिस्ट्री से संबंधित स्टांप ड्यूटी की धनराशि के इस्तेमाल पर सवाल उठे हैं।
जांच में इस धनराशि के फ्लैट निर्माण में इस्तेमाल किए जाने की बात दर्ज है। अब विशेष लेखा परीक्षण के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि समिति के पास आई रकम का वास्तविक इस्तेमाल कहां और किस मद में हुआ।
जांच अधिकारियों को रिकॉर्ड नहीं देने का आरोप
मामले में समिति के सचिव और पदाधिकारियों पर जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं करने के आरोप भी दर्ज हैं। विभागीय पत्राचार में समिति से आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, लेकिन दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई।
इसी वजह से समिति के अभिलेखों को कब्जे में लेने की कार्रवाई का रास्ता अपनाया गया। दस्तावेज में उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम के तहत अभिलेखों के अभिग्रहण और आगे की कार्रवाई का उल्लेख है।
कार्यालय सील, रिकॉर्ड सुरक्षित करने की कार्रवाई
समिति के कार्यालय को सील किए जाने के साथ ही उसके बही-खाते और अन्य अभिलेख सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू हुई। विभागीय आदेश में रिकॉर्ड को कब्जे में लेने के लिए अधिकारी नामित किए गए हैं।
शिकायतकर्ताओं की मांग है कि केवल कागजी रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि समिति के कंप्यूटर, अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर और डिजिटल रिकॉर्ड भी सुरक्षित किए जाएं, ताकि जांच के दौरान किसी तरह की छेड़छाड़ की संभावना न रहे।
15 साल के खातों की होगी Special Audit
मामले का सबसे अहम पहलू अब 15 वर्षों के आय-व्यय और बैंक खातों की विशेष लेखा परीक्षा है।
आवास विकास परिषद के 12 जून 2026 के पत्र में समिति के पिछले 15 वर्षों के आय-व्यय और बैंक खातों का विशेष लेखा परीक्षण कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई करने को कहा गया है। दस्तावेज में यह भी दर्ज है कि मामला विधान परिषद की संबंधित समिति के विचाराधीन है।
इस ऑडिट से यह पता चल सकता है कि सदस्यों से प्राप्त रकम, निर्माण पर खर्च, बैंक खातों में लेन-देन और अन्य वित्तीय गतिविधियां नियमों के मुताबिक थीं या नहीं।
प्रबंधन पर भी कार्रवाई के संकेत
दस्तावेजों में समिति की प्रबंधन समिति की कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर टिप्पणियां हैं। समिति के पदाधिकारियों द्वारा नियमों का पालन नहीं करने और जांच में सहयोग नहीं करने के आरोपों के आधार पर संबंधित प्रावधानों के तहत आगे कार्रवाई की बात कही गई है।
