सुजलॉन के शेयर में 10% तक की गिरावट, 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंचा स्टॉक

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Suzlon Stock Crash_ 10% गिरावट

नई दिल्ली। पवन ऊर्जा क्षेत्र की कंपनी Suzlon Energy के शेयरों में शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को भारी बिकवाली देखने को मिली। कंपनी का शेयर कारोबार के दौरान करीब 10 प्रतिशत तक टूटकर 52 सप्ताह के नए निचले स्तर पर पहुंच गया। कमजोर ऑपरेटिंग मार्जिन, मुनाफे के आंकड़ों में बड़ी गिरावट और ब्रोकरेज फर्मों की ओर से टारगेट प्राइस घटाए जाने से निवेशकों का भरोसा प्रभावित हुआ।

₹33.21 तक फिसला शेयर

शुक्रवार को सुजलॉन एनर्जी का शेयर कारोबार के दौरान करीब 9.73 प्रतिशत गिरकर ₹33.21 तक पहुंच गया। इससे पहले शेयर का 52 सप्ताह का निचला स्तर लगभग ₹36.30 था। कंपनी के शेयर में गिरावट ऐसे समय आई है, जब बाजार कंपनी के दूसरी तिमाही के नतीजों का आकलन कर रहा है।

मुनाफे में 69 प्रतिशत की गिरावट

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में सुजलॉन एनर्जी का रिपोर्टेड कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर लगभग 69.2 प्रतिशत घटकर ₹394 करोड़ रह गया। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने करीब ₹1,279 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया था।

हालांकि, पिछले साल की समान तिमाही में ₹891 करोड़ के डिफर्ड टैक्स एसेट से जुड़ा एक बड़ा लाभ शामिल था। इस असाधारण प्रभाव को अलग रखकर तुलना करने पर कंपनी का मुनाफा लगभग 1.3 प्रतिशत बढ़ा।

आय बढ़ी, लेकिन मार्जिन ने बढ़ाई चिंता

कंपनी की परिचालन आय दूसरी तिमाही में करीब 26 प्रतिशत बढ़कर ₹4,869 करोड़ हो गई। इसके बावजूद EBITDA लगभग ₹720 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के करीब ₹721 करोड़ के लगभग बराबर है।

इसका असर कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन पर पड़ा। EBITDA मार्जिन पिछले साल के 18.6 प्रतिशत से घटकर लगभग 14.8 प्रतिशत रह गया। निवेशकों की चिंता का प्रमुख कारण यही है कि कंपनी की आय बढ़ने के बावजूद परिचालन लाभ में उसी अनुपात में सुधार नहीं हुआ।

ब्रोकरेज फर्मों ने घटाए टारगेट

तिमाही नतीजों के बाद कई ब्रोकरेज फर्मों ने सुजलॉन के शेयर को लेकर अपने अनुमान बदले हैं।

  • JM Financial: रेटिंग ‘Buy’ से घटाकर ‘Add’ की और टारगेट प्राइस ₹46 से घटाकर ₹40 किया।
  • Nuvama Institutional Equities: ‘Hold’ रेटिंग बरकरार रखी, लेकिन टारगेट प्राइस ₹51 से घटाकर ₹41 किया।
  • UBS: ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी, हालांकि टारगेट प्राइस ₹66 से घटाकर ₹58 किया।

ब्रोकरेज की राय और टारगेट प्राइस अनुमान होते हैं, भविष्य में शेयर के प्रदर्शन की गारंटी नहीं। अलग-अलग फर्मों की राय में अंतर भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है।

कंपनी के सामने क्या हैं चुनौतियां?

सुजलॉन के सामने ऑपरेटिंग मार्जिन को बेहतर बनाने, नकदी प्रवाह मजबूत रखने और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच विकास की गति बनाए रखने की चुनौती है। कंपनी का ऑर्डर बुक मजबूत बना हुआ है और दूसरी तिमाही में पवन टर्बाइन की डिलीवरी भी बढ़ी है। इसके बावजूद निवेशक यह देखना चाहेंगे कि कंपनी बढ़ती आय को टिकाऊ मुनाफे में कितना बदल पाती है।

क्या सुजलॉन का शेयर खरीदना चाहिए या नहीं?

शेयर के 52 सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंचने का मतलब यह नहीं है कि वह तुरंत ऊपर जाएगा या सस्ता हो गया है। निवेश से पहले कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन, नकदी प्रवाह, ऑर्डर की डिलीवरी, प्रतिस्पर्धा और मौजूदा वैल्यूएशन का आकलन जरूरी है।

जो निवेशक पहले से इस शेयर में पैसा लगाए हुए हैं, उन्हें भी केवल गिरावट देखकर जल्दबाजी में औसत घटाने या पूरी हिस्सेदारी बेचने का फैसला नहीं करना चाहिए। निर्णय अपनी निवेश अवधि, जोखिम सहने की क्षमता और वित्तीय स्थिति के आधार पर लेना बेहतर होगा।

 

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