भूटान में कुदरत का कहर: फ्लैश फ्लड से सोलर सिंचाई प्रोजेक्ट ठप
थिम्फू/पुनाखा। पड़ोसी देश भूटान में अचानक आई बाढ़ ने कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया है। पुनाखा जिले में मो छू नदी में आए फ्लैश फ्लड के कारण इसी साल स्थापित किया गया सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई सिस्टम क्षतिग्रस्त हो गया और उसने काम करना बंद कर दिया। बाढ़ के साथ बहकर आए भारी मलबे के कारण पुनाखा-गासा हाईवे का एक हिस्सा भी प्रभावित हुआ है।
रिपोर्टों के मुताबिक, भूटान के गासा जिले में स्थित शिंताफू झील से अचानक पानी निकलने को बाढ़ की संभावित वजह माना जा रहा है। इस घटना के बाद निचले इलाकों में नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। वहीं, भारत के पश्चिम बंगाल और असम के कुछ क्षेत्रों में भी अचानक बाढ़ आने की आशंका के मद्देनजर सतर्कता बढ़ाई गई है।
पुनाखा में सोलर सिंचाई परियोजना को नुकसान
भूटान के पुनाखा जिले के गुम्मा गेवोग क्षेत्र के दोछुखा-जोमलिंगथांग-रित्सा इलाके में सौर ऊर्जा से चलने वाला सिंचाई लिफ्टिंग सिस्टम स्थापित किया गया था। इसका उद्देश्य स्थानीय किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने में मदद करना था।
लेकिन मो छू नदी में अचानक आई बाढ़ के पानी ने इस परियोजना को नुकसान पहुंचाया। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया है। हालांकि, परियोजना को कितना आर्थिक नुकसान हुआ है, इसका पूरा आकलन अभी किया जाना बाकी है।
इसी साल लगाया गया था सिंचाई सिस्टम
सौर ऊर्जा आधारित यह परियोजना स्थानीय लोगों की सिंचाई संबंधी समस्याओं को कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। पहाड़ी क्षेत्रों में खेती के लिए पानी उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण होता है, ऐसे में इस तरह की परियोजनाओं को किसानों के लिए उपयोगी माना जाता है।
लेकिन प्राकृतिक आपदा के कारण परियोजना को नुकसान पहुंचने से सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। सिस्टम की मरम्मत और दोबारा संचालन के लिए कितना समय लगेगा, यह नुकसान के आकलन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
हाईवे पर मलबा, आवाजाही प्रभावित
फ्लैश फ्लड के साथ बहकर आए पत्थरों, मिट्टी और अन्य मलबे ने जोमलिंगथांग इलाके में पुनाखा-गासा हाईवे के एक हिस्से को प्रभावित किया है। इससे सड़क पर यातायात बाधित होने की खबर है।
पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक बाढ़ के दौरान नदी का पानी अपने साथ बड़ी मात्रा में मलबा बहाकर लाता है। इससे सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। प्रशासन के सामने अब प्रभावित सड़क मार्ग और सिंचाई परियोजना की स्थिति का आकलन करने की चुनौती है।
शिंताफू झील से बाढ़ आने की आशंका
प्रारंभिक रिपोर्टों में गासा जिले की शिंताफू झील से अचानक पानी निकलने को बाढ़ की संभावित वजह बताया गया है। इस तरह की घटना को ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहा जाता है। इसमें हिमनदों के पास बनी झील से अचानक बड़ी मात्रा में पानी बाहर निकलता है, जो नीचे की ओर तेज बहाव के साथ तबाही मचा सकता है।
ऐसी बाढ़ से नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है और रास्ते में आने वाले गांवों, सड़कों, पुलों तथा अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि, इस घटना के सटीक कारण और नुकसान की पूरी तस्वीर संबंधित अधिकारियों के आकलन के बाद ही सामने आएगी।
भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी सतर्कता
भूटान में बाढ़ की घटना के बाद भारत के कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है। पश्चिम बंगाल और असम के नदी किनारे स्थित संवेदनशील इलाकों में संभावित जलस्तर वृद्धि पर नजर रखी जा रही है।
प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर निगरानी बनाए हुए हैं। लोगों को नदी के किनारे जाने से बचने, स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने और अचानक जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जाती है।
जनहानि की खबर नहीं, नुकसान का आकलन जारी
शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पहले से निकासी किए जाने के कारण अब तक किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं मिली है। हालांकि, तेज बहाव और अंधेरे के कारण बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का तत्काल आकलन करना मुश्किल रहा।
अधिकारियों की निगरानी और नुकसान के आकलन के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सोलर सिंचाई परियोजना, सड़क और अन्य ढांचों की मरम्मत पर कितना खर्च आएगा।
भूटान में फ्लैश फ्लड ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ के खतरे को उजागर किया है। पुनाखा में सौर सिंचाई परियोजना का ठप होना और हाईवे पर मलबा जमा होना स्थानीय बुनियादी ढांचे पर पड़े असर को दर्शाता है। अब सभी की नजर नुकसान के आकलन, सड़क मार्ग की बहाली और सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति पर बनी हुई है।
