हरिद्वार की हर की पौड़ी पर गंगा की धारा गायब!
हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित प्रसिद्ध हर की पौड़ी घाट पर गंगा का जल प्रवाह कम होने से श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गंगा स्नान की इच्छा लेकर यहां पहुंचे कई श्रद्धालुओं को निराश लौटना पड़ा। दरअसल, ऊपरी गंगनहर को सालाना सफाई और मरम्मत के लिए 18 दिनों तक बंद किया गया है। इसके चलते हर की पौड़ी पर सामान्य जल प्रवाह प्रभावित हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, 7 नवंबर 2026 की मध्यरात्रि के आसपास नहर में पानी फिर से छोड़े जाने की योजना है।
गंगा स्नान के लिए पहुंचे श्रद्धालु हुए निराश
हर की पौड़ी हरिद्वार के सबसे प्रमुख धार्मिक घाटों में शामिल है। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु गंगा स्नान, पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं।
लेकिन गंगनहर बंद होने के कारण घाट पर स्नान के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। कई श्रद्धालुओं को अपनी यात्रा के दौरान अपेक्षित रूप से गंगा स्नान करने का अवसर नहीं मिल पाया।
कुछ श्रद्धालुओं ने कहा कि वे गंगा में स्नान करने की उम्मीद से हरिद्वार आए थे। अब वे आचमन या गंगाजल के छिड़काव से ही अपनी धार्मिक आस्था पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं।
18 दिनों के लिए क्यों बंद की गई गंगनहर?
ऊपरी गंगनहर को हर साल सफाई, निरीक्षण और जरूरी मरम्मत के लिए कुछ समय के लिए बंद किया जाता है। इस अवधि में नहर और उससे जुड़ी जल संरचनाओं की जांच की जाती है तथा जरूरी सुधार कार्य पूरे किए जाते हैं।
इस बार भी 20 अक्टूबर की रात से नहर में जल प्रवाह रोका गया। इसके साथ ही हरिद्वार में वर्ष 2027 में होने वाले अर्धकुंभ से संबंधित कुछ निर्माण और बुनियादी ढांचे के कामों को आगे बढ़ाने की योजना है।
अधिकारियों के मुताबिक, नहर की सालाना बंदी से उन हिस्सों की जांच करना आसान होता है, जिनमें पानी बहने के दौरान खराबी या नुकसान का पता लगाना मुश्किल होता है।
7 नवंबर की रात फिर शुरू होगा पानी
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, ऊपरी गंगनहर को 7 नवंबर 2026 की मध्यरात्रि के आसपास दोबारा चालू किया जाना है। इसके बाद हर की पौड़ी पर जल प्रवाह बहाल होने की उम्मीद है।
हालांकि, पानी का वास्तविक प्रवाह नहर में जल आपूर्ति शुरू होने और संबंधित व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगा। अधिकारियों ने यह भी बताया है कि गंगा आरती के समय घाट पर पानी उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था की जा सकती है।
गंगा आरती और धार्मिक गतिविधियों पर असर
हर की पौड़ी पर प्रतिदिन होने वाली गंगा आरती देश-विदेश के श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। घाट पर पानी कम होने से स्नान और कुछ धार्मिक गतिविधियों को लेकर परेशानी सामने आई है।
प्रशासन और सिंचाई विभाग के सामने चुनौती यह है कि मरम्मत कार्य भी समय पर पूरे हों और प्रमुख धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं को यथासंभव सुविधा मिलती रहे।
स्थानीय कारोबारियों को भी नुकसान की आशंका
हरिद्वार में धार्मिक पर्यटन से जुड़े दुकानदारों, प्रसाद विक्रेताओं, फूल-माला बेचने वालों और अन्य छोटे कारोबारियों की आजीविका श्रद्धालुओं की आवाजाही पर निर्भर करती है।
घाट पर स्नान की सुविधा प्रभावित होने से कुछ कारोबारियों ने चिंता जताई है कि त्योहारों के मौसम में उनकी बिक्री कम हो सकती है। गंगा स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या घटने का असर आसपास के बाजारों पर भी पड़ने की आशंका है।
सूखे घाट पर सिक्के और दूसरी वस्तुएं तलाशते दिखे लोग
गंगा का जलस्तर कम होने के बाद कुछ लोग घाट के सूखे हिस्सों में उतरकर सिक्के और श्रद्धालुओं की ओर से अर्पित दूसरी वस्तुएं तलाशते दिखाई दिए। आम दिनों में ये वस्तुएं पानी के भीतर रहती हैं, लेकिन जल प्रवाह रुकने पर उन्हें खोजना आसान हो जाता है।
दिल्ली-NCR और पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर भी असर
ऊपरी गंगनहर दिल्ली-NCR और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए पानी का महत्वपूर्ण स्रोत है। इसकी बंदी का असर पेयजल आपूर्ति, सिंचाई और कुछ औद्योगिक जरूरतों पर भी पड़ सकता है।
संबंधित विभागों को इस अवधि में जल प्रबंधन और मरम्मत कार्यों के बीच संतुलन बनाए रखना होगा, ताकि आम लोगों और किसानों को होने वाली परेशानी कम की जा सके।
हरिद्वार की हर की पौड़ी पर गंगा का सामान्य जल प्रवाह ऊपरी गंगनहर की सालाना मरम्मत के कारण प्रभावित हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, 7 नवंबर की मध्यरात्रि के आसपास नहर दोबारा चालू करने की योजना है। तब तक श्रद्धालुओं को घाट पर स्नान और धार्मिक गतिविधियों से जुड़ी सुविधाओं के बारे में स्थानीय प्रशासन की ताजा जानकारी लेकर ही यात्रा की योजना बनानी चाहिए।
